Gita Gyana Yagna, Mumbai: June 2018

A week-long GITA GYANA YAGNA by Poojya Guruji Sri Swami Atmanandaji was organized at Vivekananda Auditorium, in RK Math, Khar, Mumbai, from 4th to 10th June 2018. The subject matter of the twin discourse series were Gita Chapter 18 and Manukya Upanishad: Agama Prakarana.

In the 18th Chapter of Bhagwad Gita, Poojya Guruji explained the final question of Arjuna, which was asking about the real meanings of Sanyaas & Tyaga. While Sanyaas was explained as just the absence of self-centric desires, Tyaga was explained as Karma-phala tyaga. Moreover, Bhagwan said the tamasic people simply give up karma itself, the rajasic people give up inconvenient karmas. It is only the sattwic who give up that which needs to be given up, and that is, the expectations, ego etc. For this Bhagwan says that the easiest way it to make your thoughts & actions sattwic, then you will be easily doing the most important sattwic tyaga.

In the Mandukya Upanishad, we are revealed the Self-Knowledge science and that is based on our three avasthas. This is then associated with Om, and the entire teaching then becomes Om based.

Links: 

Gita Chapter-18

Mandukya – Agama Prakarana

This entry was posted on June 18, 2018, in GGY, Mission.

Vedanta Sandesh – June 2018

The June 2018 edition of Vedanta Sandesh is the English monthly eMagazine of International Vedanta Mission, containing inspiring and enlightening articles of Vedanta & Hinduism, and news of the activities of Vedanta Mission & Ashram – has been published. You can check it out from the links below:

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Vedanta Sandesh is a free magazine, and you are welcome to share it with your friends & relatives. May the good values & vision spread to bless the lives of one & all.

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This entry was posted on June 1, 2018, in Magazines.

हनुमान चालीसा मासिक सत्संग: मई २०१८

मई २०१८ का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २७ को वेदांत आश्रम में हुआ। पूर्ववत पहले भक्त मण्डली के द्वारा सुन्दर भजनो का आयोजन हुआ। बाद में पूज्य गुरूजी के आने के बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ और तत्पश्यात पूज्य गुरूजी का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी उन्होंने २५वीं और २६वीं चौपाईयों में सूचित साधनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया की यह बात निश्चित रूप से सत्य है की जैसे २५वीं चौपाई में कहा गया है की हनुमानजी की कृपा से सब रोग नष्ट हो जाते हैं और पीड़ाएँ भी समाप्त हो जाती हैं, और २६वीं चौपाई में बताया गया है की हनुमानजी हम सबको संकट से छुड़ा देते हैं – लेकिन यहाँ एक बात दृष्टव्य है की ऐसी कृपा की प्राप्ति के लिए हमारा भी कुछ पुरुषार्थ आपेक्षित है। अगर कोई यह सोचे की केवल निवेदन करने से हनुमानजी यह सब कर देंगे, तो यह पूर्ण सत्य नहीं है। गोस्वामीजी ने स्पष्ट कहा है की २५वीं चौपाई का फल तो तभी प्राप्त होगा जब हम – जपत निरंतर हनुमत वीरा। हमें निरंतर हनुमानजी की महिमा का जप करना चाहिए। जप साधना की बहुत महिमा है। गीता में भी कहा गया है की – यज्ञानां जपयज्ञोस्मि। जप का प्रयोजन अपने इष्ट का सतत संज्ञान बताये रखना होता है। यह स्मरण परिस्थिति निरपेक्ष होना चाहिए। परिस्थिति अच्छी हो या बुरी ईश्वर का भान जो भी बनाये रखता है उसे कोई भी संकट कैसे आ सकता है। संकट तो तभी आता है जब कुछ अपने छोटे से कंधों पर बोझा आ जाता है। जब हमें लगता है की सब कुछ हम ही करते हैं। ऐसे लोग ही तनाव ग्रसित हो जाते हैं।

२६वीं चौपाई में गोस्वामीजी कहते हैं की यहाँ भी संकट से निवृत्ति नैमित्तिक है। उसी व्यक्ति का सब संकट दूर हो जाएगा जो एक विशेष साधना की सिद्धि करेगा। और वो है – मन क्रम वचन धयान जो लावै। संकट से निवृत्ति, हनुमानजी के सुन्दर ध्यान रुपी साधना का आशीर्वाद है। यह ध्यान भी बहुत समग्रता से होना चाहिए। वे कहते हैं की जो व्यक्ति मन, कर्म और वचन तीनों धरातल का प्रयोग करता हुआ भगवन का ध्यान करता है – उस ध्यान से ही एक विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। केवल धयान ही नहीं बल्कि कोई भी काम जब समग्रता से किया जाये तब ही हमें सफलता प्रदान करता है।  हनुमानजी उस जीवन दर्शन के प्रतिक हैं जो अपने लिए नहीं बल्कि अपने भगवन राम के लिए ही जीते हैं।  ऐसे निःस्वार्थ व्यक्ति को अपनी तो कोई समस्या होती ही नहीं है।  अतः ऐसे भक्तों के निश्चित रूप से सब संकट दूर हो जाते हैं।

अंत में पूज्य गुरूजी २७वीं चौपाई में मात्र प्रवेश करते हुए भगवन श्री राम जो सबसे उत्कृष्ट हैं उनके भी कार्य हनुमानजी पूरे करते हैं इसीसे हम सबको हनुमानजी की महिमा का ज्ञान होता है।  इस चौपाई की विस्तृत चर्चा २४वीं  जून को होगी। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण से हुआ।

लिंक्स: 

फोटो एल्बम 

प्रवचन 

Raghu Iyer gives Photography Tips

On 26th May, Sh Raghu Iyer, a very dedicated and passionate Wildlife Photographer was invited to Vedanta Ashram to enlighten the Ashram Mahatmas & devotees about the intricacies and tips of Field Photography. After the darshan of Bhagwan Sri Gangeshwar Mahadev in the Ashram Mandir, we had our very enlightening session of more than 90 minutes.

Raghu brought a very helpful chart for everyone to get an idea of Aperture / Shutter & ISO adjustments. He brought his various award-winning pictures and explained them too.

His wife Jaishree and son Ashwin also came. After dinner for which they also brought a lovely dish, Jaishree Raghunandan sang two lovely bhajans in Carnatic music style, which literally had a cool meditative effect.

Photo Album Link 

अखिल हर्डिया जी द्वारा फोटोग्राफी के टिप्स

दिनांक  २३ मई २०१८ को वेदान्त  आश्रम में इंदौर शहर के जाने-माने फोटोग्राफर श्री अखिल हर्डिया जी को आश्रम के अंतेवासियों को फोटोग्राफी का मूलभूत एवं आवश्यक ज्ञान देने हेतु आमंत्रित किया गया। अखिलजी इस क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से समर्पित हैं, और अभी वे स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहते हैं। इससे पूर्व वे अनेको वर्षो से दैनिक भास्कर समूह से जुड़े रहे, और उन्हें सैकड़ों पुरस्कार से अलंकृत किया जाता रहा है। आज वे देवी अहिल्याबाई विस्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन के विजिटिंग फैकल्टी भी हैं।

उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष प्रकाश डाला:

– कैमरे और लेंस का परिचय

– अच्छी फ़ोटो खीचने के लिए किन बातों के ध्यान रखना चाहिए

– ज्यादा और कम लाइट में कैसे फ़ोटो खिंचे

– कम लाइट में बिना फ़्लैश

– फोकस करने के बावद, कई बार ऑटो-फोकस फोकस ही करता ही रहता है, और समय निकल जाता है

– उड़ते पक्षी आदि की फ़ोटो

– डेप्थ ऑफ़ फील्ड कम-ज्यादा करना

– चलती वस्तु की फ़ोटो

– एक्सपोज़र कम-ज्यादा करना

वे अपने साथ कुछ अपनी विशेष फोटो भी लाये थे, जिन्हे उन्होंने समझा के बतलाया। बाद में कुछ प्रश्न-उत्तर भी हुए। उनके साथ फोटोग्राफी के एक प्रेमी श्री नवीन चंद्र थापक जी भी आये थे। थापकजी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के एक सेवा निवृत्त मैनेजर हैं।

बाद में भोजन का आयोजन था।

 

Vedanta Sandesh – May 2018

The May 2018 edition of Vedanta Sandesh is the English monthly eMagazine of International Vedanta Mission, containing inspiring and enlightening articles of Vedanta & Hinduism, and news of the activities of Vedanta Mission & Ashram – has been published. You can check it out from the links below:

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This entry was posted on May 1, 2018, in Magazines.

हनुमान चालीसा सत्संग: अप्रैल २०१८

अप्रैल २०१८ का हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २९ अप्रैल को वेदांत आश्रम में आयोजित हुआ। पूर्ववत पहले सुन्दर भजनों  की प्रस्तुति हुई और फिर पूज्य गुरूजी के व्यास पीठ पर पधारने के बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। तदोपरांत प्रवचन का प्रारम्भ हुआ। उसमे पहले २५वीं चौपाई पर चर्चा हुई और फिर २६वीं चौपाई में प्रवेश हुआ।

 

२५वीं चौपाई पर चर्चा करते हुए पूज्य गुरूजी ने बताया की रोग स्थूल शरीर में होते हैं और पीड़ा मन में होती है, रोग भी दर्द देता है, लेकिन आसक्त और अज्ञानी मन पीड़ा को कई गुना बढ़ा देता है। कई बार तो मन अनेकानेक समस्यों की उपेक्षा करके व्यथा से मुक्त भी रह सकता है। अतः अगर मन विवेकी होता है तो हमारे विविध रोग और तद्जनित पीड़ाएँ नष्ट-प्रायः हो जाती हैं। इस अत्यंत कल्याणकारी सिद्धि के लिए यहाँ गोस्वामीजी कहते हैं की व्यक्ति में निरंतर जप का सामर्थ्य होना चाहिए। शरीर और मन के विकारों से मुक्त रहने का सामर्थ्य की प्राप्ति में जप का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। जप में हम अपने मन को धन्यता से ईश्वर के चरणों में लगाना सीखते हैं। जब मन हमारी इच्छा से कहीं और लग सकता है तो स्वाभाविक है की बाकि किसी चीज की संवेदना नहीं रहती है। कोई भी अनुभूति हम लोगों की मानसिक संवेदना पर ही आश्रित होती हैं। अतः अपनी प्रेरणा के आस्पद के चरणों में मन लगा पाने की सिद्धि हमें विकारों से अप्रभावित कर देती है। यह हमारे इष्ट की ही कृपा से होता है।

जप के बारे में पूज्य गुरूजी ने आगे बताया की जप जो की ईश्वर की एक विभूति है, उसके तीन सोपान हैं – उच्च जप, मंद जप, और चित्तजम जप, और इसका पर्यवसान ध्यान की सिद्धि में होता है। इन तीनो के बारे में संक्षेप में बताया गया, और सभी को नित्य ईश्वर के नाम का जप करने की प्रेरणा दी गयी, तथा निरंतर जप का भी आशय बताया गया। निरंतर जप का आशय सतत ईश्वर की सन्निधि का अनुभव होता है – जो की परिस्थिति निरपेक्ष हो। अर्थात सुख हो अथवा दुःख, ईश्वर के अस्तित्व और माहत्म्य का सतत अनुभव और स्मरण होता है। विवेकी व्यक्ति रोग आदि का बाहरी उपचार तो करता ही है, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण मन का सामर्थ्य होता है। यह ही इस सुन्दर चौपाई का रहस्य है।

२६वीं चौपाई में प्रवेश करते हुए उन्होंने बताया की गोस्वामिजी कहते हैं की जप की सिद्धि का पर्यवसान ध्यान के सामर्थ्य की प्राप्ति होती है, और जब यह सामर्थ्य प्राप्त होने लगता है तब तो हनुमानजी की कृपा से कोई संकट रहते ही नहीं हैं। ध्यान की महिमा को आज विश्व ने जाना है, इसीलिए इसकी इतनी प्रसिद्धि हो गयी है। ध्यान में किसी वस्तु में हमारा मन तल्लीन हो जाता है। मन न रहे दस-बीस अतः एक मन कहीं लीं हो जाता है तो कोई संकट नहीं रहता है। ऐसे व्यक्ति की बुद्धि भी विकसित होने लगती है, अतः किसी भी समस्याओं का प्रामाणिक उपचार का शोध होता है और असंगता भी। पूज्य गुरूजी ने कहा की इस विषय को अगले सत्र में आगे चर्चा के लिए लेंगे।

अंत में आरती और प्रसाद वितरण हुआ।

लिंक्स: 

फोटो एल्बम 

प्रवचन 

Gita Gyana Yagna, Jalgaon

A week-long GITA GYANA YAGNA was organized at Dutta Mandir, Jalgaon by Poojya Swamini Poornanandaji. The program was from 16th to 22nd April, and the subject matter of the twin discourses were : Gita Chapter 10 and Narada Bhakti Sutras.

This entry was posted on April 21, 2018, in GGY, Mission.

Sankaracharya Jayanti Celebrations

On 20th April 2018 was the Jayanti of Bhagwan Sri Aadi Sankaracharya – Jyestha Shukla Panchami. The great Acharya was born in Kalady village of Kerala in 509 BC (and not 788 AD) which makes it 2527 years earlier. He literally started the rennaisance of Sanatan Dharma, presented the subtle tenets of Sanatan Dharma very logically, rejuvenated the religious traditions & systems etc. He is no wonder very venerated Mahatma.

At Vedanta Ashram we have a statue of Bhagwan Sankaracharya in our Satsang Hall, and also a Sankaracharya Gate in the E-Sector of Sudama Nagar with his statue. A special program was organized in the evening. After paying obesainces at the feet of the great Acharya in the Ashram, Poojya Guruji along with Ashram Mahatmas and devotees went in a procession to the Sankaracharya Dwar. Using a ladder one of the devotees Sh Vinod Puri of Dashnam Goswami Samaj, went upto the statue and cleaned it, did abhishek, and appropriately decorated it. Later Aarti was done and prasad distributed.

Later after coming back to Ashram, Poojya Guruji gave a short overview of the life of Aadi Sankara. Later poha & tea was organized for all.

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‘Birds of Indore’- Presentation

On 14th April 2018, Saturday evening, an Audio-Visual Presentation on the topic of BIRDS OF INDORE by Padma Shri Bhalu Mondheji was organized at Vedanta Ashram. Bhaluji is a well acclaimed Conservationist and Nature-Lover, who along with his NGO, the Natures Volunteers, has done pioneering work to restore & rejuvenate the Sirpur Lake of Indore.  Today Sirpur Lake has been designated as an IBA – Important Bird Area, by the BNHS. The area has around 300+ species of birds including the state bird of MP, namely, the beautiful Asian Paradise Flycatcher.

The presentation was organized in the second floor Dining Hall, and the enthusiasm was such that it was shortly fully packed. Projector and Screen were timely organized, and the program started around 8.00 PM and lasted for 90 minutes. It was a great eye-opener for many, who have been living in the city but were not aware of its avian heritage. In the end there were some Q&A too. In the end Baisakhi Dinner was organized for all – courtesy Sh Vinod Arora & family.

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This entry was posted on April 15, 2018, in Ashram.