Archive | January 2018

हनुमान चालीसा सत्संग : जनवरी २०१८

जनवरी २०१८ माह का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २१ जनवरी को था। कार्यक्रम का शुभारम्भ सूंदर भजनों  से हुआ और फिर सबने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ  किया। तदुपरांत पूज्य गुरूजी स्वामी आत्मानंद जी ने अपना प्रवचन चालीसा की २३ वी चौपाई (आपन तेज सम्हारो आपै। ..) पर ही आगे बढ़ाया।

अपने प्रवचन में पूज्य गुरूजी ने बताया की हनुमानजी का तेजस अतुल्य है, गोस्वामीजी कहते हैं की केवल वे ही इसे धारण कर सकते हैं। इतना तेजस धारण करने की क्षमता एक सामान्य मनुष्य अथवा योनि में नहीं दिखती है। उन्होंने इसकी तुलना भगवान शंकर से की जब उन्होंने गंगाजी को धारण किया था। जैसे गंगाजी को धारण करने वाला और कोई नहीं है, उसी तरह हनुमानजी का तेजस है। गीता में भगवान् श्री कृष्ण कहते हैं की वे ही तेजस्वीओं का तेज हैं अतः तेज ईश्वर  की ही आभा है। हनुमानजी का अंत्यंत महान तेज उनके सबसे महँ ज्ञान से युक्त होने का प्रमाण है – वे रामजी के तत्त्व के ज्ञाता है। वे ब्रह्म ज्ञानी हैं। इसी लिए इतने तेजस्वी हैं।

आगे गोस्वामीजी कहते हैं की – तीनों लोक हांक ते कापै, जब हनुमानजी लंका से वापस जा रहे थे तब उन्होंने बड़ी जोर से चिक्खार करि, आवाज़ की, गर्जना करी – उसे सुन कर लंकावासिओं की हृदयगति थमने सी लगी, गर्भिणियों के गर्भ गिरने लगे। ये सब एक अत्यंत बलवान और उत्साही व्यक्ति का सूचक है।

भगवद गीता का हवाला देते हुए पूज्य स्वामीजी ने कहा की जब अर्जुन को भगवन ने स्थित प्रज्ञ के बारे में बताया तो उसने अपनी और जिज्ञासा प्रगट करते हुए पूछा की स्थित प्रज्ञ के बारे में कृपया और बताएं – की उसके लक्षण क्या होते हैं, वह अपने साथ होता है तो कैसा होता है, और जब दुनिया की विविध परस्थितियों में वो अभिव्यक्तियाँ करता है तो वो कैसी होती हैं आदि, इसी तरह से यहाँ पर गोस्वामीजी हनुमानजी जैसे अदभुत ज्ञानी के बारे में पूछता है की वे जब अपने साथ होते हैं तो कैसे होते हैं और जब विविध परस्थितियों में अभिव्यक्तियां करते हैं तो वो कैसे होती हैं – इसी का उत्तर दे रहे हैं. की सामान्य रूप से वे तेज के पुंज हैं। और जब विविध परिस्थियों में अभिव्यक्त होते हैं तो वह अंत्यंत समग्र होती है।  यह ही दिव्य तेज और भयंकर हांक शब्दों से कह रहे हैं।

इस कार्यक्रम में पूज्य गुरूजी के एक पुराने शिष्य स्वामी माधवानंद जी, जो के चिन्मय मिशन रांची में कार्यरत हैं गुरूजी के दर्शन हेतु आये थे। उन्होंने भी अंत में आभार के दो शब्द कहे। कार्यक्रम सा समापन आरती से हुआ।

 

Links : 

Pravachan

Photo Album

Sw Samatanandaji visits Dubai

P. Swamini Samatanandaji had a five days talks at Dubai from 16th to 20th Jan 2018. She was invited there by a dedicated student of Vedanta, Geeta Nayar and her husband Chandy. The first talk was on Om & Ek Omkar. Next three were on the first chapter of Bhagwad Geeta, while the last session was on Karma Yoga.

During the trip, the hosts & other devotees took her around the lovely city and also to Abu Dhabi.

This entry was posted on January 25, 2018, in Mission.

Gita Gyana Yagna, Baroda

A week-long Gita Gyana Yagna by P. Swamini Amitanandaji was organized at Atma Jyoti Ashram, Ellora Park, Baroda from 5th to 12th Jan 2018. The subject matter of the twin discourse series were Gita Chapter-8 and Kathopanishad 2-1 in Gujrati.

Links of Albums along with other links are given below. The pravachans were recorded, both audio & video, and have since been uploaded.

Album

Pravachan Links:

Gita Ch – 8

Kathopanishad 2-1

 

This entry was posted on January 13, 2018, in GGY, Mission.

Mahashivratri (Vedanta) Camp – Feb 2018

A six days residential Mahashivratri (Vedanta) Camp is being organized at the Vedanta Ashram, Sudama Nagar, Indore. The Camp will be of five days from 8th to 13th Feb 2018, and the conclusion will be with the celebration of Mahashivratri on the 13th Feb.

Camp Acharyas:

The pravachans will be conducted by Poojya Guruji Swami Atmanandaji and Poojya Swamini Amitanandaji. The Meditation and Chanting sessions will be by Poojya Swamini Samatanandaji, while the Puja sessions will be guided by Poojya Swamini Poornanandaji.

Venue :

Vedanta Ashram, E/2948, Sudama Nagar, Indore-452009 (MP)

Subjects :

Pravachans on Kaivalyopanishad ‘Shiv Sankalpa Suktam‘.

Chanting on Kaivalyopanishad

All the sessions will be in Hindi.

Who can apply:

Any healthy, sincere devotee who can live in the simple & austere atmosphere of an Ashram, without any complaints & problems, and wish to study Vedanta at the feet of traditional teachers can apply. The campers will have to stay inside the venue for all these six days. They will be given rooms with twin sharing. There are few rooms with attached bath/Lat, while others have common bath/lat facilities. No outing during the camp is allowed, and if at all there is some emergency they will take permission of the Acharyas to go out.

No outside food is permitted or encouraged. The timings of food & tea is fixed, and the menu is simple & sattwic. Filtered water is available 24×7.

Campers should be ready to serve in whatever way necessary to help keep the place clean & quiet.

All campers will have to attend all the classes and should be punctual to be in the class few minutes before.

Campers will just have to bring their minimum necessary clothes and toiletries. Bedding will be provided by the Ashram.

Routine :

6.00 AM – Meditation

6.30 – Tea

7.00 – Pravachan on the  ‘Kaivalyopanishad‘ (by Poojya Guruji)

8.30 – Breakfast

9.30 – Pravachans on the ‘Kaivalyopanishad‘ (by Poojya Guruji)

11.30 – Discussion

1.00 – Lunch

4.00 PM – Tea

4.30 – Chanting on ‘Kaivalyopanishad‘ (by Swamini Samatanandaji)

5.00 – Pravachan on ‘Shiv Sankalpa Suktam‘ (by Swamini Amitanandaji)

6.30 – Temple Aarti

7.30 – Dinner

8.30 – Bhajan / Que & Ans / Cultural events

10.00 – Lights off

Travel Plans:

The Campers will have to reach the venue latest by 7th Feb evening and can leave by 14th Feb as per their conveniences. Any change will have to be notified earlier.

Registration:

1. Please fill up the online Registration Form by following the link or check out the form below.

2. All the classes are free, but the campers have to take care of the various stay & food expenses etc. The fee for all these logistics, per person, has been fixed at Rs 5000/- for the six days stay. You can deposit this amount by going to our Donate Page and choosing any convenient mode of payment.

Note: Pl inform us by email about the mode & other details of the donation at vmission@gmail.com

Venue Map:

Map URL

 

 

This entry was posted on January 2, 2018, in Camp.

Vedanta Sandesh : Jan 2018

The Jan 2018 edition of Vedanta Sandesh is the English monthly eMagazine of International Vedanta Mission, containing inspiring and enlightening articles of Vedanta & Hinduism, and news of the activities of Vedanta Mission & Ashram – has been published. You can check it out from the links below:

Links:  Vedanta Sandesh is available on all of the following sites, and can be either downloaded or read online.

  1. Issuu

  2. Scribd

  3. GDocs

  4. Box

Getting VS in your Folder directly: Now that we have Google Drive , our subscribers with Gmail can get the VS directly in their Google Drive Folder – the moment it is published. Interested people can let us know so that we can add their email id’s in Direct Share Facility.

Vedanta Sandesh is a free magazine, and you are welcome to share it with your friends & relatives. May the good values & vision spread to bless the lives of one & all.

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This entry was posted on January 1, 2018, in Magazines.

Hanuman Chalisa Satsang: Dec 2017

दिसम्बर २०१७ का अंतिम हनुमान चालीसा सत्संग साल के अंतिम दिन और अंतिम रविवार दिनांक ३१ को वेदांत आश्रम में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का प्रारम्भ सुन्दर भजनो से हुआ। सुनील कुमार ओझा और गुलाब चाँद व्यास जी ने पूज्य गुरूजी स्वामी आत्मानंद जी का स्वागत पुष्प माला से किया। सबने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ  किया, और फिर राम-नाम संकीर्तन के बाद प्रवचन का शुभारम्भ हुआ। इस बार चालीसा की २३वीं  चौपाई पर चिंतन हुआ – आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों  लोक हाँक ते कापै ।।

अपने प्रवचन में पूज्य गुरूजी ने बताया की हनुमानजी अत्यंत तेजस्वी हैं, और कोई भी ऐसा नहीं हैं जो उनके तेज का पराभव कर सके। पराभव तो दूर की बात है कोई उनका सामना भी नहीं कर सकता है। व्यक्तित्व का तेज अनेकों प्रकार से अभिव्यक्त होता है – चेहरे की दिव्य चमक, शरीर में उत्साह, विचारों में उमंग और सूक्ष्म विचार, और मन में निर्भीकता और अन्य दैवी गुण । तेज से युक्त व्यक्ति में कोई चिंता, भय और तनाव आदि का तो नामोनिशान नहीं दिखता है। आज के समय में जब तनाव का चारों तरफ बोलबाला और साम्राज्य है लोग मानों तेज विहीन से हो गए हैं। अच्छी शिक्षा और संस्कार व्यक्ति को सुन्दर और तेजस्वी व्यक्तित्व का धनी बना देते हैं। वो ही ज्ञान सुन्दर और कल्याणकारी है जो हमें सुन्दर और तेजस्वी व्यक्तित्त्व से युक्त करे। ऐसे व्यक्ति के लिए समस्याएं भी मात्र परिस्थिति बन जाती हैं, और जो इनसे विहीन होते हैं उनके लिए है एक परिस्थिति भी समस्या बन जाती है। एक निर्मलानंद जी महाराज जी ने कहा है – पहले हम कतरे को भी दरिया समझ कर डूब जाते थे , लेकिन निर्मल अब तो हम दरिया को भी कतरा समझते हैं। यह ही हनुमान जी के व्यक्तित्व का लक्षण था। उन्होंने दरिया को कतरे की तरह ही देखा और आसानी से कूद गए। और आगे भी क्या क्या किया यह सामान्य व्यक्तियों के लिए अकल्पनीय था।

गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं की जो भी हमारी परा प्रकृति को जनता है वो यह भी जानता  है की हम ही तेजस्वीओं में तेज हैं। अपरा और परा प्रकृति को जानने वाला व्यक्ति ही अंततः उस ईश्वरीय सूत्र को भी जनता है जो एक मणियों की माला में सूत्र की तरह सब में अनुस्यूत होता है। ऐसा व्यक्ति स्पष्ट रूप से देखता है की ईश्वर ही बुद्धिमानों में बुद्धि, तेजस्वियों में तेज आदि की तरह स्थित है। अर्थात महान तेज का धनी व्यक्ति वो ही होता है जो ऐसे तत्त्व ज्ञान से युक्त होता है, और हनुमानजी का महान तेज उनके ऐसे तत्त्व ज्ञान का ही सूचक है। उनके बारे में कहा ही गया है की वे ज्ञानिनाम अग्रगण्यम हैं। वस्तुतः हनुमानजी ब्रह्मज्ञान के तेज से युक्त हैं इसी लिए उनके तेज की कोई तुलना नहीं है।  यहाँ गोस्वामीजी कहते हैं की आपन तेज सम्हारो आपै – अर्थात ब्रह्मज्ञान को धारण करने वाला हनुमानजी जैसा ही कोई विरला होता है। आप ही ऐसे ब्रह्मज्ञान से जनित तेज को धारण कर सकते हैं। हनुमानजी की तुलना शिवजी से ही करी जा सकती है, जिन्होंने गंगाजी को धारण किया था। जब गंगाजी का अवतरण हो रहा था तो प्रश्न हुआ की गंगा जी को धारण कौन कर सकता है तब पता चला की यह काम तो केवल शिव जी ही कर सकते हैं और तब भगीरथ जी ने उन्हें मनाया। वैसे ही हनुमानजी का तेज वे ही संभल सकते हैं।

आगे गोस्वामीजी कहते हैं की तीनों  लोक हांक  ते कापैं। जब लंका से निकलते हुए उन्होंने हांक लगाइ तो वह इतनी भयंकर थी की लंका में गर्भनियों के गर्भ गिरने लगे। ऐसे थे बजरंगबली हनुमानजी।

Links :

Album 

Pravachan 

 

Gita Gyana Yagna, Lucknow

A week-long Gita Gyana Yagna by P. Swamini Samatanandaji was organized at Sarveshwar Mahadev Mandir, SBI Colony, Lucknow from 21st to 28th Dec 2017. The subject matter of the twin discourse series were Gita Chapter-3 and Sadhana Panchakam.

This entry was posted on January 1, 2018, in GGY, Mission.