Hanuman Chalisa Satsang: Dec 2017

दिसम्बर २०१७ का अंतिम हनुमान चालीसा सत्संग साल के अंतिम दिन और अंतिम रविवार दिनांक ३१ को वेदांत आश्रम में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का प्रारम्भ सुन्दर भजनो से हुआ। सुनील कुमार ओझा और गुलाब चाँद व्यास जी ने पूज्य गुरूजी स्वामी आत्मानंद जी का स्वागत पुष्प माला से किया। सबने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ  किया, और फिर राम-नाम संकीर्तन के बाद प्रवचन का शुभारम्भ हुआ। इस बार चालीसा की २३वीं  चौपाई पर चिंतन हुआ – आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों  लोक हाँक ते कापै ।।

अपने प्रवचन में पूज्य गुरूजी ने बताया की हनुमानजी अत्यंत तेजस्वी हैं, और कोई भी ऐसा नहीं हैं जो उनके तेज का पराभव कर सके। पराभव तो दूर की बात है कोई उनका सामना भी नहीं कर सकता है। व्यक्तित्व का तेज अनेकों प्रकार से अभिव्यक्त होता है – चेहरे की दिव्य चमक, शरीर में उत्साह, विचारों में उमंग और सूक्ष्म विचार, और मन में निर्भीकता और अन्य दैवी गुण । तेज से युक्त व्यक्ति में कोई चिंता, भय और तनाव आदि का तो नामोनिशान नहीं दिखता है। आज के समय में जब तनाव का चारों तरफ बोलबाला और साम्राज्य है लोग मानों तेज विहीन से हो गए हैं। अच्छी शिक्षा और संस्कार व्यक्ति को सुन्दर और तेजस्वी व्यक्तित्व का धनी बना देते हैं। वो ही ज्ञान सुन्दर और कल्याणकारी है जो हमें सुन्दर और तेजस्वी व्यक्तित्त्व से युक्त करे। ऐसे व्यक्ति के लिए समस्याएं भी मात्र परिस्थिति बन जाती हैं, और जो इनसे विहीन होते हैं उनके लिए है एक परिस्थिति भी समस्या बन जाती है। एक निर्मलानंद जी महाराज जी ने कहा है – पहले हम कतरे को भी दरिया समझ कर डूब जाते थे , लेकिन निर्मल अब तो हम दरिया को भी कतरा समझते हैं। यह ही हनुमान जी के व्यक्तित्व का लक्षण था। उन्होंने दरिया को कतरे की तरह ही देखा और आसानी से कूद गए। और आगे भी क्या क्या किया यह सामान्य व्यक्तियों के लिए अकल्पनीय था।

गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं की जो भी हमारी परा प्रकृति को जनता है वो यह भी जानता  है की हम ही तेजस्वीओं में तेज हैं। अपरा और परा प्रकृति को जानने वाला व्यक्ति ही अंततः उस ईश्वरीय सूत्र को भी जनता है जो एक मणियों की माला में सूत्र की तरह सब में अनुस्यूत होता है। ऐसा व्यक्ति स्पष्ट रूप से देखता है की ईश्वर ही बुद्धिमानों में बुद्धि, तेजस्वियों में तेज आदि की तरह स्थित है। अर्थात महान तेज का धनी व्यक्ति वो ही होता है जो ऐसे तत्त्व ज्ञान से युक्त होता है, और हनुमानजी का महान तेज उनके ऐसे तत्त्व ज्ञान का ही सूचक है। उनके बारे में कहा ही गया है की वे ज्ञानिनाम अग्रगण्यम हैं। वस्तुतः हनुमानजी ब्रह्मज्ञान के तेज से युक्त हैं इसी लिए उनके तेज की कोई तुलना नहीं है।  यहाँ गोस्वामीजी कहते हैं की आपन तेज सम्हारो आपै – अर्थात ब्रह्मज्ञान को धारण करने वाला हनुमानजी जैसा ही कोई विरला होता है। आप ही ऐसे ब्रह्मज्ञान से जनित तेज को धारण कर सकते हैं। हनुमानजी की तुलना शिवजी से ही करी जा सकती है, जिन्होंने गंगाजी को धारण किया था। जब गंगाजी का अवतरण हो रहा था तो प्रश्न हुआ की गंगा जी को धारण कौन कर सकता है तब पता चला की यह काम तो केवल शिव जी ही कर सकते हैं और तब भगीरथ जी ने उन्हें मनाया। वैसे ही हनुमानजी का तेज वे ही संभल सकते हैं।

आगे गोस्वामीजी कहते हैं की तीनों  लोक हांक  ते कापैं। जब लंका से निकलते हुए उन्होंने हांक लगाइ तो वह इतनी भयंकर थी की लंका में गर्भनियों के गर्भ गिरने लगे। ऐसे थे बजरंगबली हनुमानजी।

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