Archive | March 2018

हनुमान चालीसा सत्संग: मार्च २०१८

वेदांत आश्रम में दिनांक  25/3 को मार्च मॉस के मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन हुआ। प्रारम्भ में पूर्ववत भजनो का कार्यक्रम हुआ, और फिर हनुमान चालीसा के पाठ  के बाद पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानंदजी महाराज का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी कुछ समय २४वीं  चौपाई पर चर्चा करने के बाद २५वे चौपाई (नाशै  रोग हरै  सब पीरा।  जपत निरंतर हनुमत बीरा।।) में प्रवेश हुआ।

पूज्य गुरूजी ने बताया की भूत और पिशाच काम और क्रोध के अतिरेक की अभिव्यक्तियाँ होते हैं। वैसे भी जब किसी को काम और क्रोध का आवेश आता है – तो भी वह भूत की ही तरह उसके ऊपर चढ़ कर उन्हें अपने वश में कर अकल्पनीय काम करवा देता है, जब मनुष्य अपने वश में नहीं रह पता है, लेकिन अत्यंत जोश में कार्य भी करता है – तभी कहा जाता है की उसके ऊपर कोई भूत सा चढ़ गया है।  पिशाच क्रोध के अतिरेक की बाह्य अभिव्यक्ति होती है – ऐसे लोग हिंसक भी हो सकते हैं। जहाँ भूत मनुष्य को बेबस करके कुछ कार्य करवाता है, वहीँ, पिशाच मनुष्य को संवेदनाविहीन करके हिंसक भी कर देता है। ऐसे लोगों को देखा जाये तो एक बात स्पष्ट दिखती है की ये लोग मूल रूप से स्वार्थ से ही प्रेरित होते हैं। दूसरी तरफ भक्ति तो अपने आराध्य के प्रति शरणागति है। भक्त तो यह देखता है की जो भी चल रहा है वो सब ईश्वर की ही कृपा से चल रहा है, और इस तरह वो अपने स्वार्थ प्रेरित आकांक्षाओं से मुक्त रहता है। सात्त्विक मन में काम और क्रोध आदि विकारों के अस्तित्व नहीं होता है, अतः भूत-प्रेत आदि का चढ़ना उनके जीवन में नहीं होता है। बल्कि अगर किसी के ऊपर ऐसी कुछ छाया भी हो तो धन्यता की प्रतिमूर्ति हनुमानजी के स्मरण मात्र से दूर हो जाती है।

पूज्य गुरूजी ने बताया की यद्यपि यह चौपाई भूत-पिशाच से निवृत्ति के उपाय बताने के कारण अत्यंत प्रसिद्ध है, क्यूंकि अज्ञानी लोगों को अनेकानेक चीज़ों का डर  लगा रहता है, लेकिन इस चौपाई की विवक्षा मूल रूप कुछ और है। मूल विवक्षा तो महावीर के नाम उच्चारण की महिमा है।

कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद से हुआ।

लिंक्स: 

Pravachan

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मंदिरों का आध्यात्मिक विकास में योगदान

आध्यात्मिक विकास मूल रूप से मात्र ज्ञान से सम्भव होता है, लेकिन तत्त्व ज्ञान के किये एक सात्त्विक, सूक्ष्म और संवेदनशील मन की आवश्यकता होती है। यह ही विविध साधनाओं का प्रयोजन होता है। ईश्वर शब्द का वाच्यार्थ अर्थ देखने से आवश्यक गुण प्राप्त हो जाते हैं। जो वाच्यार्थ को नहीं देख सकता उस के लिए लक्ष्यार्थ देखना तो कल्पना मात्र है। सनातन धर्म में ईश्वर शब्द का प्रारम्भ में वाच्यार्थ देखने की बहुत महिमा होती है। हम लोगों के अनेकानेक मंदिरों का यह ही प्रयोजन होता है। जब कोई श्रद्धालु मंदिर जाता है तो ईश्वर का विग्रह देख के मन में अनेकों परिवर्तनों की संभावना होती है – जो की हम लोगों के आध्यात्मिक विकास में महत्व पूर्ण योगदान देते हैं।  इन विविध परिवर्तनों की चर्चा पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्दजी ने अपने मुंडक उपनिषद् के प्रवचनों में एक दिन की।

आश्रम के सभी महात्माओं ने इस विषय को भिन्न-भिन्न भाषाओँ में प्रस्तुत किया है। पूज्य गुरूजी ने हिंदी में, पूज्य स्वामिनी अमितानंदजी ने गुजराती में, पूज्य स्वामिनी पूर्णानन्दजी ने मराठी में, एवं पूज्य स्वामिनी समतानन्दजी ने अंग्रेजी भाषा में इस महत्वपूर्ण विषय को प्रस्तुत किया है। प्रवचन ध्यान से सुनाने योग्य है।

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Talk in Gujarati – by P. Swamini Amitanandaji :

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Talk in Marathi – by P. Swamini Poornanandaji :

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Talk in English – by P. Swamini Samatanandaji :

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This entry was posted on March 14, 2018, in Ashram.

ગીતા જ્ઞાન યજ્ઞ, અમદાવાદ

અમદાવાદ નાં પ્રહલાદનગર માં સ્થિત સમુત્કર્ષ માં પૂજ્ય સ્વામીની અમિતાનંદજી નાં સાત દિવસીય ગીતા જ્ઞાન યજ્ઞ નું આયોજન તારીખ 5 માર્ચ થી 12 માર્ચ 2018  સુધી કરવા માં આવ્યું. આ યજ્ઞ ની પ્રવચન શૃંખલા માં પૂજ્ય સ્વામિનીજી એ સવાર નાં સત્ર માં આદિ શંકરાચાર્યજી દ્વારા રચિત દૃગ્ દૃશ્ય વિવેક ઉપર તથા સાંજ નાં સત્ર માં ભગવદ્દ ગીતા નાં ચોથા અધ્યાય જ્ઞાન કર્મ સંન્યાસ યોગ પર પ્રવચન કર્યું.

સમુત્કર્ષ અકાદમી યોગ , અધ્યાત્મ તથા Holistic living હેતુ એક સમર્પિત સંસ્થા છે. આ સંસ્થા પૂજ્ય સ્વામિનીજી નાં છેલ્લા ત્રણ વર્ષ થી પ્રવચન નું પ્રતિવર્ષ આયોજન કરે છે.

 

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This entry was posted on March 14, 2018, in GGY.

गीता ज्ञान यज्ञ, लखनऊ

लखनऊ के लाल बाग़ क्षेत्र में स्तिथ हरी ॐ मंदिर में पूज्य गुरूजी स्वामी आत्मानंद जी का होलाष्टक में ६ दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ का आयोजन दिनांक २३ फरवरी से १ मार्च २०१८ को आयोजित हुआ। इस प्रवचन श्रृंखला में भगवद गीता के राजविद्या राजगुह्य योग नामक नवें अध्याय पर एवं प्रातःकाल मुण्डकोपनिषद के द्वितीय मुण्डक के द्वितीय खंड पर प्रवचन हुए।

हरिओम मंदिर के मुख्य सभागृह के जीर्ण-उद्धार के उपरांत यह वहां पर यह पहली प्रवचन माला थी। नवीन सभागृह भव्य और सुन्दर बनाया गया है।

 

Links: 

Gita Chapter-9

Mundakopanishad 2-2

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This entry was posted on March 5, 2018, in GGY, Mission.

Vedanta Sandesh – Mar 2018

The Mar 2018 edition of Vedanta Sandesh is the English monthly eMagazine of International Vedanta Mission, containing inspiring and enlightening articles of Vedanta & Hinduism, and news of the activities of Vedanta Mission & Ashram – has been published. You can check it out from the links below:

Links:  Vedanta Sandesh is available on all of the following sites, and can be either downloaded or read online.

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  3. GDocs

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This entry was posted on March 1, 2018, in Magazines.