हनुमान चालीसा मासिक सत्संग: मई २०१८

मई २०१८ का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २७ को वेदांत आश्रम में हुआ। पूर्ववत पहले भक्त मण्डली के द्वारा सुन्दर भजनो का आयोजन हुआ। बाद में पूज्य गुरूजी के आने के बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ और तत्पश्यात पूज्य गुरूजी का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी उन्होंने २५वीं और २६वीं चौपाईयों में सूचित साधनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया की यह बात निश्चित रूप से सत्य है की जैसे २५वीं चौपाई में कहा गया है की हनुमानजी की कृपा से सब रोग नष्ट हो जाते हैं और पीड़ाएँ भी समाप्त हो जाती हैं, और २६वीं चौपाई में बताया गया है की हनुमानजी हम सबको संकट से छुड़ा देते हैं – लेकिन यहाँ एक बात दृष्टव्य है की ऐसी कृपा की प्राप्ति के लिए हमारा भी कुछ पुरुषार्थ आपेक्षित है। अगर कोई यह सोचे की केवल निवेदन करने से हनुमानजी यह सब कर देंगे, तो यह पूर्ण सत्य नहीं है। गोस्वामीजी ने स्पष्ट कहा है की २५वीं चौपाई का फल तो तभी प्राप्त होगा जब हम – जपत निरंतर हनुमत वीरा। हमें निरंतर हनुमानजी की महिमा का जप करना चाहिए। जप साधना की बहुत महिमा है। गीता में भी कहा गया है की – यज्ञानां जपयज्ञोस्मि। जप का प्रयोजन अपने इष्ट का सतत संज्ञान बताये रखना होता है। यह स्मरण परिस्थिति निरपेक्ष होना चाहिए। परिस्थिति अच्छी हो या बुरी ईश्वर का भान जो भी बनाये रखता है उसे कोई भी संकट कैसे आ सकता है। संकट तो तभी आता है जब कुछ अपने छोटे से कंधों पर बोझा आ जाता है। जब हमें लगता है की सब कुछ हम ही करते हैं। ऐसे लोग ही तनाव ग्रसित हो जाते हैं।

२६वीं चौपाई में गोस्वामीजी कहते हैं की यहाँ भी संकट से निवृत्ति नैमित्तिक है। उसी व्यक्ति का सब संकट दूर हो जाएगा जो एक विशेष साधना की सिद्धि करेगा। और वो है – मन क्रम वचन धयान जो लावै। संकट से निवृत्ति, हनुमानजी के सुन्दर ध्यान रुपी साधना का आशीर्वाद है। यह ध्यान भी बहुत समग्रता से होना चाहिए। वे कहते हैं की जो व्यक्ति मन, कर्म और वचन तीनों धरातल का प्रयोग करता हुआ भगवन का ध्यान करता है – उस ध्यान से ही एक विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। केवल धयान ही नहीं बल्कि कोई भी काम जब समग्रता से किया जाये तब ही हमें सफलता प्रदान करता है।  हनुमानजी उस जीवन दर्शन के प्रतिक हैं जो अपने लिए नहीं बल्कि अपने भगवन राम के लिए ही जीते हैं।  ऐसे निःस्वार्थ व्यक्ति को अपनी तो कोई समस्या होती ही नहीं है।  अतः ऐसे भक्तों के निश्चित रूप से सब संकट दूर हो जाते हैं।

अंत में पूज्य गुरूजी २७वीं चौपाई में मात्र प्रवेश करते हुए भगवन श्री राम जो सबसे उत्कृष्ट हैं उनके भी कार्य हनुमानजी पूरे करते हैं इसीसे हम सबको हनुमानजी की महिमा का ज्ञान होता है।  इस चौपाई की विस्तृत चर्चा २४वीं  जून को होगी। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण से हुआ।

लिंक्स: 

फोटो एल्बम 

प्रवचन