Archive | June 2018

Namaste

During Gita Gyan Yagna at Ahmedabad Swamini Amitanandaji was invited by Sh. Dasadia family to bless Sh. Ketanbhai Dasadia & his family. This function was organized on the ocassion of meeting all friends & relatives at Ahmedabad, as Ketanbhai recently shifted from Bhavnagar to Ahmedabad for the further education of his two sons.

This function was in Page One Hotel, Vastrapur. Program was started with beautiful presentation of Bhajans, songs and Gazals on guitar by a young college student Nirdesh Kumar. which was followed by the speech of P. Swaminiji on “Namaste”.  The impact effect of this speech was immediately seen and those who attended this function started doing greet by “Namaste” mudra instead of Shaking hands.

The speech was Self Respect invoking to our tradion.

 

VISITED F.R.I.G.E

During Gita Gyan Yagya at Ahmedabad, on 29th June Swamini Amitanandaji visited FRIGE (Foundation of Reasearch in Genetic and Endocrinology) in Ahmedabad. This institute is run by Dr. Jayesh Sheth, Dr. Frenny Sheth along with a group of scientists and clinical doctors.This institute was inaugurated by Our Late Pres. Dr. APJ Abdul Kalam.

Dr. Jayesh Sheth and his wife Dr. Frenny Sheth are doing exemplary research work at Foundation for Research in Genetics and Endocrinology (FRIGE), Ahmedabad. Dr. Jayesh Sheth has done research on rare diseases of Genetic disorders. He is awarded by Dr. Abdul Kalam.

Dr Frenny Sheth has received Lifetime Achievement Award for Initiatives, Discoveries, and Developments in the discipline of Cytogenetics and Molecular Cytogenetics by Vinus International Research Awards in December 2016″

Poojya swaminiji has interactive session with those scientists & doctors students & FRIGE staff.
The topic of this discussion was “What is the Nature of God & why should we believe in God?” All the members participated nicely and at the end P. Swaminiji concluded this topic. Overall it was enlightening & motivational session.

At the end Dr. Jayesh Sheth delivered thanks to all.

हनुमान चालीसा सत्संग: जून २०१८

जून २०१८ का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २४ को वेदांत आश्रम में हुआ। पूर्ववत पहले भक्त मण्डली के द्वारा सुन्दर भजनो का आयोजन हुआ। बाद में पूज्य गुरूजी के आने के बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ और तत्पश्यात पूज्य गुरूजी का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार उन्होंने २७वीं चौपाई पर प्रकाश डाला – सब पर राम तपस्वी राजा … ।

पूज्य गुरूजी ने अपने उद्बोधन में बताया की २७वीं चौपाई में गोस्वामीजी ने पहले भगवन श्री राम की महिमा बताई और फिर बतया की ऐसे प्रभु के समस्त कार्य हनुमानजी ने संपन्न करे। यह शैली एक साहित्यिक अलंकार है। अतः हमें भी इस चौपाई को समझने के लिए पहले रामजी की महिमा का स्मरण करना चाहिए। रामजी तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं उन्होंने तो समस्त क्षेत्र में मर्यादाओं की स्थापना की है। आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श शिष्य, आदर्श पति, आदर्श  मित्र, और सबसे महत्वपूर्ण है आदर्श राजा। वे तो धर्म के मूर्तिमान स्वरुप थे। पूरी रामायण उन्ही की महिमा का बखान कर रही है। रामजी का अवतरण त्रेता युग में हुआ था लेकिन आज भी उनका राज्य आदर्श राज्य की तरह से जाना जाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जिनके कठिन प्रयास और सूझ-बुझ से देश को आज़ादी मिली वे नित्य रामजी का भजन किया करते थे, और स्वतंत्र भारत में राम राज्य की स्थापना उनका भी सपना था।

ऐसे समर्थ और ज्ञानी रामजी ने जितने भी विशेष कार्य संपन्न किये उन सभी में ज्यादातर हनुमानजी उनके चुने हुए निमित्त थे। किसी भी राजा की विशेषता मूल रूप से उसकी दूर-दृष्टी और व्यापक निति होती है, और कोई भी निति तभी सफल होती है जब उसका उचित क्रियान्वयन हो। हनुमानजी क्रियान्वयन के सबसे सूंदर अधिकारी और पात्र थे। हनुमानजी के जीवन और शब्द कोष में असंभव शब्द था ही नहीं, इसलिए रामजी का जो भी संकल्प होता था उसकी सिद्धि सुनिश्चित हो जाती थी।

कुछ लोगो के मन में यहाँ पर एक विचार आ सकता है, की हनुमानजी की ही वजह से रामजी से समस्त कार्य संभव हो पाए। लेकिन जो भी ऐसा विचार भी लता है वह हनुमानजी सो समझता ही नहीं है, और ऐसे विचार से वह हनुमानजी का आशीर्वाद नहीं प्राप्त करेगा बल्कि उनके आक्रोश का भागी बनेगा, क्योंकि हनुमानजी के दृष्टिकोण से यह पूर्णरूप से असत्य है।  जब लंका से वे लौटे तब भगवन श्री राम ने उनके स्तुति करी और पुछा की हनुमान यह तो बताओ की यह सब असंभव तो तुमने कैसे संभव कर दिया। इस पर हनुमानजी बोले की प्रभु हम जो भी करते हैं वो सब आपकी ही महिमा है, हम तो एक वानर मात्र हैं यह आपकी ही महिमा है की एक वानर को भी इतना महिमा मंडित करवा देता है। अतः रामजी की महिमा केवल ाची निति आदि बनाना नहीं है, बल्कि असमर्थ को समर्थ बना के उससे असंभव कार्य करावा देते हैं। रामजी तो त्रिलोक विजेता रावण की लंका को मात्र वानरों की सेना से जीत लेते हैं। अतः हनुमानजी की महिमा भी प्रभु राम की ही महिमा है।

इस चौपाई में एक बात और कही गयी है, और वो है रामजी ऐसे महान कैसे बने। उन्होंने एक शब्द का प्रयोग किया है और वो हैं – तपस्वी। तपस्या ही व्यक्ति तो निर्मल कर देती है वो ही व्यक्ति को महान बनाती है। भगवान का चौदह वर्ष का वनवास शायद सभी को यह ही सन्देश दे रहा है। तपस्वी व्यक्ति काम से काम चीजों में अपना जीवन सुख पूर्वक जीना सीख गया है। इसलिए वो अपने स्वार्थ की नहीं सोचता है। जो स्वार्थ से मुक्त है वो ही सबके कल्याण के बारे में सोच सकता है। पूज्य गुरूजी ने कहा की इस तपस्या के विषय पर वे अगली बार विस्तृत रूप से चर्चा करेंगे।

कार्येक्रम के अंत में पूर्ववत आरती और प्रसाद वितरण हुआ।

लिंक्स: 

फोटो एल्बम 

प्रवचन 

Gita Gyana Yagna, Mumbai: June 2018

A week-long GITA GYANA YAGNA by Poojya Guruji Sri Swami Atmanandaji was organized at Vivekananda Auditorium, in RK Math, Khar, Mumbai, from 4th to 10th June 2018. The subject matter of the twin discourse series were Gita Chapter 18 and Manukya Upanishad: Agama Prakarana.

In the 18th Chapter of Bhagwad Gita, Poojya Guruji explained the final question of Arjuna, which was asking about the real meanings of Sanyaas & Tyaga. While Sanyaas was explained as just the absence of self-centric desires, Tyaga was explained as Karma-phala tyaga. Moreover, Bhagwan said the tamasic people simply give up karma itself, the rajasic people give up inconvenient karmas. It is only the sattwic who give up that which needs to be given up, and that is, the expectations, ego etc. For this Bhagwan says that the easiest way it to make your thoughts & actions sattwic, then you will be easily doing the most important sattwic tyaga.

In the Mandukya Upanishad, we are revealed the Self-Knowledge science and that is based on our three avasthas. This is then associated with Om, and the entire teaching then becomes Om based.

Links: 

Gita Chapter-18

Mandukya – Agama Prakarana

This entry was posted on June 18, 2018, in GGY, Mission.

Vedanta Sandesh – June 2018

The June 2018 edition of Vedanta Sandesh is the English monthly eMagazine of International Vedanta Mission, containing inspiring and enlightening articles of Vedanta & Hinduism, and news of the activities of Vedanta Mission & Ashram – has been published. You can check it out from the links below:

Links:  Vedanta Sandesh is available on all of the following sites, and can be either downloaded or read online.

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This entry was posted on June 1, 2018, in Magazines.