Archive | August 2018

हनुमान चालीसा मासिक सत्संग : अगस्त २०१८

अगस्त २०१८ का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक १९ को वेदांत आश्रम में आयोजिय हुआ। पूर्ववत पहले भक्त मण्डली के द्वारा सुन्दर भजनो का आयोजन हुआ। बाद में पूज्य गुरूजी के आने के बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ और तत्पश्यात पूज्य गुरूजी का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी उन्होंने २८वीं चौपाई पर प्रकाश डाला और उसका समापन भी किया – और मनोरथ जो कोई लावै … ।

पूज्य गुरूजी ने बताया की चालीसा के इन अंतिम चौपायिओं में भगवत भजन और भक्ति के, वो भी विशेष रूप से हनुमानजी की कृपा कैसे-कैसी प्राप्त होती है। रोगों की निवृत्ति, संकटों की समाप्ति आदि की चर्चा हो चुकी है । अब यहाँ आगे कहते हैं की इसके आलावा अगर किसी भक्त में और कोई भी अन्य मनोकामना है तो वो भी हनुमानजी की कृपा से अवश्य पूरी हो जाएगी, तथा उसे अमित फल की प्राप्ति हो जाएगी। ‘और मनोरथ’ जो कोई लावै। सोइ ‘अमित’ जीवन फल पावै। यह तो सामान्य अर्थ हो गया – इसमें किसी भी भक्त की कोई भी विशेष इच्छा हुई तो वो भी अवश्य पूरी हो जाएगी, ऐसा आश्वाशन है। लेकिन  विशेष अर्थ तो कुछ और ही है।

इस ‘और मानोरथ’ शब्द में क्या विशेष अर्थ है? इसे समझने के लिए हमें इसके फल पर ध्यान देना होगा। गोस्वामीजी कहते हैं की हम उस मनोरथ की बात कर रहे हैं जिसका फल अमित होता है – अमित फल पावैं। हम सब जानते हैं की इस संसार में हम सब को ईश्वर कृपा से अनेकानेक फल प्राप्त हुए हैं। धन, दौलत, भोग, विलास, रिश्ते-नाते, मान-सम्मान आदि आदि। अनेकों लोग तो महलों में रह कर स्वर्ग तुल्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। लेकिन विडम्बना यह है की तब भी हमें और ज्यादा की तलाश है। क्यों की हम सब यह भी अनुभव करते हैं की अभी दिल तृप्त नहीं हुआ है, अभी भी ये दिल मांगे मोर। हर व्यक्ति को तो यह समझ में नहीं आता है की संसार के भोग कभी भी हमें तृप्त नहीं करते हैं, इसलिए वे अधिक एवं विश्ष्ट फल की प्रार्थना और कामना करते रहते हैं। लेकिन कुछ विवेकी लोग यह अवश्य समझ जाते हैं की मूल रूप से हमारी संसारी इच्छाओं में ही अविवेक है। हमें किसी इच्छा रखने से पहले यह जानना आवश्यक है की मूल रूप से हमें क्या चाहिए, हम सबके दिल की मूल आकांक्षा क्या है। कोई विरले लोग ही इस बात पर विचार करते हैं, ज्यादातर लोग तो दुनिया पर अंध विश्वास रखे उसी पथ पर दौड़ते जाते हैं जिस पर दुनिया दौड़ रही है। जो कोई भी अपने दिल की मूल आकांक्षा पर विचार करता है वो यह जान जाता है की हमारी इच्छा मित  फल की नहीं लेकिन अमित फल की है। अध्यात्म पथ पर चलने वाले विरले लोग इसीलिए अमित स्वरुप परमात्मा की प्राप्ति को ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य समझते हैं। जिसे नापा नहीं जा सकता है वह अमित होता है। अमित पूर्ण होता है। और पूर्ण तत्त्व किसी मित  अर्थात छोटी वास्तु की तरह दुनिया में बहार नहीं मिलता है, वह तो पहले से ही सभी देश, काल और वस्तुओं में विद्यमान होता है। वह प्राप्ति का नहीं बल्कि ज्ञान का विषय होता है। अमित और पूर्ण तत्त्व पहले से ही सबकी आत्मा की तरह से विद्यमान है, हमें केवक अपने बारे में मोह और अज्ञान दूर करके अपनी वास्तविकता जाननी होती है। हमें अपने मोह से मुक्ति प्राप्त करनी होती है। यह मोक्ष रुपी मनोरथ ही गोस्वामीजी और मनोरथ शब्द से संकेत कर रहे हैं। अगर हम यह पूंछे की वे ऐसे सांकेतिक रूप से मोक्ष की चर्चा क्यों कर रहे हैं तो हमें यह बात स्मरण में लानी चाहिए की मूल रूप से हनुमान चालीसा का अधिकारी एक सामान्य व्यक्ति होता है जिसके अंदर अभी परमात्मा और उनके भक्तों के प्रति आस्था और भक्ति जगानी है। अतः मोक्ष की सीधे चर्चा अनुचित और निष्प्रयोजन है। अतः वे कहते है की अगर कोई भक्त है जिसे अमित फल की आकांक्षा है तो उसे भी प्रभु के प्रति सच्ची भक्ति से बहुत आशीर्वाद प्राप्त होता है।  भगवद भक्ति से ही मन निर्मल होता है और उसके बाद ही मोक्ष की प्राप्ति का द्वार खुलता है। निर्मल मन में विरक्ति आती है, फिर जिज्ञासा प्रगट होती है, फिर तभी कोई व्यक्ति किसी सद्गुरु के पास जाकर अपनी मोक्ष-विषयक जिज्ञासा प्रगट कर अपने गुरु से ज्ञान की प्राप्ति करता है। ब्रह्म अथवा आत्मा ज्ञान से की जो पूर्ण एवं अमित होता है उसकी प्राप्ति होती है। इस विवेचना के साथ २८वीं  चौपाई पर प्रवचन समाप्त हुआ। पूज्य गुरूजी ने बताया की अगली बार हम लोग २९वीं  में प्रवेश करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में हनुमानजी की आरती हुई और सबने प्रसाद ग्रहण किया।

लिंक्स: 

फोटो एल्बम 

प्रवचन 

Vedanta Sandesh – Aug 2018

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This entry was posted on August 1, 2018, in Magazines.