हनुमान चालीसा मासिक सत्संग : नवंबर २०१८

नवंबर २०१८ का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २५ नवंबर को वेदांत आश्रम में आयोजिय हुआ। पूर्ववत पहले भक्त मण्डली के द्वारा सुन्दर भजनो का आयोजन हुआ। बाद में पूज्य गुरूजी के आने के बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ और तत्पश्यात पूज्य गुरूजी का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी उन्होंने इस बार भी ३०वीं चौपाई के बारे में चर्चा करी – साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। 

पूज्य गुरूजी ने बताया, की साधु संत के तुम रखवारे चौपाई में गोस्वामीजी कह रहे हैं की साधु संत लोग ये बात अच्छी तरह से जानते हैं की भगवान् ही हम सबके जीवन के संचालक हैं। यद्यपि प्रत्येक मनुष्य के प्रत्येक कर्मों के फल दाता परमात्मा ही होते हैं लेकिन इस तथ्य को सब जानते नहीं हैं। ज्यादातर लोग तो अपने को ही अपने कर्मो के फल का हेतु समझते हैं जो की गलत होता है। हम लोगों का अधिकार और स्वतंत्रता तो कर्म करने मात्र में होती है। कर्मफल तो अन्य हजारों निमित्तों पर आश्रित होता है। अपने लक्ष्य के अनुरूप हम अपने कर्मों में यथा आवश्यक परिवर्तन कर सकते हैं, लेकिन यह बात अच्छी तरह से जाननी चाहिए की फल ईश्वर की इच्छा पर ही निर्भर होता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में कुछ न कुछ ऐसी परस्थितियां होती है जहाँ हम पूर्ण बेबस दिखते हैं। जैसे किसी की बिमारी, किसी का स्वभाव, देश अथवा दुनिया की स्थिति, मौसम आदि। अनेको बड़े-बड़े देश भी तूफानों के सामने कितने बेबस हो जाते हैं – ये सब हमें इस तथ्य का एहसास दिलाता है की दुनिया का संचालक कोई और है, हम नहीं। हम सबतो उन्ही ईश्वर के कृपापात्र हैं जिन्होंने हमें जीवन दान दिया है, और अनेकों कर्म आदि की स्वतंत्रता दी है। प्रत्येक बुद्धिमान मनुष्य को यह बात देखनी चाहिए, लेकिन सब नहीं देखते हैं, लेकिन साधु संत तो हम उन्ही मनुष्यों को बोलते हैं जो संभवतः इस दृष्ट दुनिया के पीछे एक अदृष्ट – ज्ञानवान और करुणामयी सत्ता को देखते हैं। वे लोग यह जानते हैं की ईश्वर और उनके दूत ही हमें जीवन देते हैं, उसका सञ्चालन करते हैं और जीवन के प्रत्येक मोड़ पर वे ही आवश्यकता पड़ने पर हमारी रक्षा करते हैं। हमारे रामजी ही हमारे जीवन को चलते हैं, और जो रामदुलारे होते हैं वे रामजी के समस्त भक्तों की रक्षा करते हैं। 

इसके बाद महाराज श्री ने बताया की जो भी इस तथ्य को जो नहीं देखता या मनाता है वो व्यक्ति अपने कर्तापन के अभिमान आदि के नीचे खुद ही दब कर तनाव आदि से मरा जाता है। आज दुनिया की अनेकानेक समस्याओं में यह एक बहुत बड़ी और विकराल समस्या बन गयी है। अभिमान और तनाव से ग्रसित लोग तो केवल नरक का ही निर्माण करते हैं न की स्वर्ग का। अतः केवल अपने लिए ही नहीं लेकिन पूरी दुनिया के लिए हम सबको इस तथ्य को देखना चाहिए परमात्मा ही हमारे जीवन को चलते हैं और रक्षा करते हैं। इस तथ्य को देखने से हम धन्यता से युक्त होकर अपना जीवन जीते हैं। 

कार्यक्रम के अंत में हनुमानजी की आरती हुई और सबने प्रसाद ग्रहण किया।

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