हनुमान चालीसा मासिक सत्संग: फरवरी २०१९

फरवरी २०१९ का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २४ फरवरी को वेदांत आश्रम में आयोजिय हुआ। पूर्ववत पहले भक्त मण्डली के द्वारा सुन्दर भजनो का आयोजन हुआ। बाद में पूज्य गुरूजी के आने के बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ और तत्पश्यात पूज्य गुरूजी का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी उन्होंने ३२वीं चौपाई पर चर्चा करी – राम रसायन तुम्हारे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

पूज्य गुरूजी ने कहा की आप सबने हनुमानजी के अनेकों रूप देखे होंगे लेकिन जो रूप इस चौपाई में बताया जा रहा है उसकी ओर शायद ही किसी का ध्यान गया हो – वो रूप है डॉक्टर हनुमानजी का। जी हाँ, गोस्वामीजी इस चौपाई में हमें हनुमानजी की एक अध्भुत महिमा बता रहे हैं, की हे हनुमानजी आपके पास दुनिया के सबसे भयावह रोग की एक अचूक औषधि है, उसका नाम है “राम रसायन”। वैसे तो प्रत्येक रोग पीड़ा दायक होता है और उसका अवश्य उपचार करना चाहिए, लेकिन उनके निवारण हेतु ईश्वर ने कोई न कोई जड़ी-बूटी आदि बना रखी हैं। किसी अच्छे और प्रामाणिक वैद्य के मार्ग निर्देशन में अनेकानेक रोगों का निवारण भी हो जाता है। लेकिन एक रोग ऐसा भयंकर होता है की जन्म-जन्मान्तरों तक जीव उससे ग्रसित रहता है और दुखी और शोकाकुल होता रहता है – वह रोग है भव-रोग। इस रोग का निवारण कोई कुशल वैद्यराज भी नहीं कर पाते है, क्यूंकि अनेकों वैद्य भी इस रोग से ग्रसित रहते हैं। इस रोग में मनुष्य के मन की गहराई में एक अपूर्णता, असंतुष्टि और असुरक्षा विद्यमान रहती है और वह जो कुछ भी सोचता और करता है वह इसी अपूर्णता की निवृत्ति हेतु करता रहता है। उसको यह नहीं पता है की कुछ करने से यह कमी का एहसास दूर नहीं होता है बल्कि और दृढ़ और प्रगाढ़ होता रहता है। अतः मनुष्य का दुर्लभ जीवन प्राप्त करके भी वह बेचैन ही बना रहता है। भव-रोग की निवृत्ति के लिए आनंद के धाम, जगत के स्वामी प्रभु रामजी के प्रति भक्ति और उन्ही की सेवा के लिए जीवन जीने की प्रधानता होनी चाहिए। जो ईश्वर की सेवा के लिए जीवन जीता है वो अपने बारे निश्चिन्त होता है इसी लिए तो वो अन्य की ख़ुशी के लिए जीवन जी पता है। हम जिसको अपने ह्रदय में रखते है उसी जैसा बन जाते है। भव-रोग की निवृत्ति के लिए ईश्वर के सेवक और दास बनाना की पूर्णता की प्राप्ति की दिशा में पहला कदम होता है। यह ही रसायन हनुमानजी सबको देते हैं और खुद भी सतत इसी तरह जीते हैं। इसीलिए गोस्वामीजी कहते हैं की राम रसायन तुम्हारे पासा, और आगे कहते हैं की – सदा रहो रघुपति के दासा। जड़ यह ही हम सबके जीवन का मूल मंत्र हो जाये तो हम बाद में नहीं बल्कि उसी क्षण से पूर्णता का आनंद लेने लगेंगे। शरणागति कहते हैं। गुरूजी ने बताया की शरणागति के सूत्र ाजले सत्र में और चर्चा करेंगें।

कार्यक्रम के अंत में हनुमानजी की आरती हुई और सबने प्रसाद ग्रहण किया।

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