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हनुमान चालीसा सत्संग – फरवरी २०१८

वेदांत आश्रम में दिनांक  18/२ को फरवरी  मॉस के मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन हुआ। प्रारम्भ में पूर्ववत भजनो का कार्यक्रम हुआ, और फिर हनुमान चालीसा के पाठ  के बाद पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानंदजी महाराज का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार २४वीं  चौपाई पर प्रवचन हुआ – भूत पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे।।

प्रारम्भ में गाया हुआ एक सुन्दर भजन :

 

उन्होंने बताया की भूत और पिशाच तामसी योनियां होती हैं, जो की मूल रूप से काम और क्रोध के अतिरेक की अग्रिम रूप और अभिव्यक्ति होती हैं। हमारे मन में जो भी विकार होते हैं वे जब प्रबल हो जाते हैं तब वे बाहर भी अभिव्यक्त हो कर दिखने लगते हैं। ईश्वर की भक्ति से युक्त होकर उनका अपने आखों से दर्शन भी इसी सिद्धांत के अनुरूप होता है। दुनियां में होती तो बहुत सारी चीजें हैं लेकिन दिखते वो ही है जिसका हमारे मन में महत्त्व होता है। जो भूतकाल की अतृप्त कामनाओं से व्यथित होते हैं उन्हें उनका भूतकाल अपनी चिंताओं और डर से युक्त होकर भूत के रूप में प्रगट होकर डराता रहता है। और जो अपनी अपूर्त आकांक्षाओं के कारण किसी न किसी बाह्य हेतु को उसका जिम्मेदार समझते हैं वे क्रोध की आग में जलते हैं और यह ही अपने अग्रिम रूप में पिशाच बनकर उन्हें डराता रहता है। ऐसे लोगों की दृष्टि से भूत पिशाच निश्चित रूप से होते हैं और उन्हें न केवल दिखते हैं बल्कि उन्हें डराते भी हैं। इन सब सिद्धांत का प्रमाण यह है की ये ही भूत आदि दूसरों को दिखते भी नहीं हैं। वेदांत का सिद्धांत है की हमारी दृष्टि ही सृष्टि उत्पन्न करती है, अतः जिन लोगों  को दिखते हैं वे सब उनके लिए निश्चित रूप से सत्य होते हैं, और उनका उचित उपचार करना आवश्यक होता है।

नकारात्मक सोच के शारीरिक अथवा मानसिक दुष्परिणाम किसी औषधियों से नहीं बल्कि सकारात्मक सोच से ही स्थायी रूप से दूर करे जा सकते हैं।  अतः गोस्वामीजी कहते हैं की जो-जो लोग ऐसे दुष्परिणामों के शिकार हैं उनके लिए हनुमानजी का नाम ही पर्याप्त है। अच्छाई के अस्तित्व की आस्था बुराई की निवृत्ति का पहला कदम होती है। अतः हनुमानजी के नाम मात्र का उच्चारण इन भूत और पिशाचों को दूर भगा देता है। हनुमानजी जैसे भक्तों के चरित्र का चिंतन आगे चल के हमें काम-क्रोध आदि विकारों से ही मुक्त करके भक्ति का प्रसाद प्रदान कर देता है। यह ही बात इस चौपाई में बताई गई है।

कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद से हुआ।

लिंक्स: 

प्रवचन

फोटो एल्बम 

Camp Conclusion

On 13th Feb, the Mahashivratri Vedanta Camp concluded very satisfactorily. The campers gave out their experiences of the camp. It was great to see that everyone go from here fully satisfied and happy.

This entry was posted on February 13, 2018, in Ashram, Camp.

Karaoke by Campers

On 11th Feb night, in place of the after dinner bhajans, there was a Karaoke Session. Most of the participants opened up and gave presentation. It was fun seeing everyone relaxed and at home. There were some very lovely presentations.

This entry was posted on February 12, 2018, in Ashram, Camp.

Trip to Sirpur

On 11th Feb afternoon, the campers were taken to Sirpur Lake for an outing and a picnic lunch.

Complete Photo Album

This entry was posted on February 12, 2018, in Ashram.

Vedanta Camp Starts

The Mahashivratri Vedanta Camp at Vedanta Ashram started on 8th Feb 2018, with campers from Mumbai, Lucknow, Bhavnagar and Ahmedabad. The subject matter of the main discourse by Poojya Guruji Swami Atmanandaji is Kaivalyopanishad. P. Swamini Amitanandaji is conducting discourses on Shiv-Sankalpa Sukta, while P. Swamini Samatanandaji is taking sessions on Meditation and also Chanting. P. Swamini Poornanandaji is directing devotees in the daily Shiv-Puja.

Apart from these sessions there is a session of Discussion in which the campers put forward their views on some topic presented to them. In the night there is a lovely session of bhajans, before we call off the day.

This entry was posted on February 9, 2018, in Ashram, Camp.

हनुमान चालीसा सत्संग : जनवरी २०१८

जनवरी २०१८ माह का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २१ जनवरी को था। कार्यक्रम का शुभारम्भ सूंदर भजनों  से हुआ और फिर सबने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ  किया। तदुपरांत पूज्य गुरूजी स्वामी आत्मानंद जी ने अपना प्रवचन चालीसा की २३ वी चौपाई (आपन तेज सम्हारो आपै। ..) पर ही आगे बढ़ाया।

अपने प्रवचन में पूज्य गुरूजी ने बताया की हनुमानजी का तेजस अतुल्य है, गोस्वामीजी कहते हैं की केवल वे ही इसे धारण कर सकते हैं। इतना तेजस धारण करने की क्षमता एक सामान्य मनुष्य अथवा योनि में नहीं दिखती है। उन्होंने इसकी तुलना भगवान शंकर से की जब उन्होंने गंगाजी को धारण किया था। जैसे गंगाजी को धारण करने वाला और कोई नहीं है, उसी तरह हनुमानजी का तेजस है। गीता में भगवान् श्री कृष्ण कहते हैं की वे ही तेजस्वीओं का तेज हैं अतः तेज ईश्वर  की ही आभा है। हनुमानजी का अंत्यंत महान तेज उनके सबसे महँ ज्ञान से युक्त होने का प्रमाण है – वे रामजी के तत्त्व के ज्ञाता है। वे ब्रह्म ज्ञानी हैं। इसी लिए इतने तेजस्वी हैं।

आगे गोस्वामीजी कहते हैं की – तीनों लोक हांक ते कापै, जब हनुमानजी लंका से वापस जा रहे थे तब उन्होंने बड़ी जोर से चिक्खार करि, आवाज़ की, गर्जना करी – उसे सुन कर लंकावासिओं की हृदयगति थमने सी लगी, गर्भिणियों के गर्भ गिरने लगे। ये सब एक अत्यंत बलवान और उत्साही व्यक्ति का सूचक है।

भगवद गीता का हवाला देते हुए पूज्य स्वामीजी ने कहा की जब अर्जुन को भगवन ने स्थित प्रज्ञ के बारे में बताया तो उसने अपनी और जिज्ञासा प्रगट करते हुए पूछा की स्थित प्रज्ञ के बारे में कृपया और बताएं – की उसके लक्षण क्या होते हैं, वह अपने साथ होता है तो कैसा होता है, और जब दुनिया की विविध परस्थितियों में वो अभिव्यक्तियाँ करता है तो वो कैसी होती हैं आदि, इसी तरह से यहाँ पर गोस्वामीजी हनुमानजी जैसे अदभुत ज्ञानी के बारे में पूछता है की वे जब अपने साथ होते हैं तो कैसे होते हैं और जब विविध परस्थितियों में अभिव्यक्तियां करते हैं तो वो कैसे होती हैं – इसी का उत्तर दे रहे हैं. की सामान्य रूप से वे तेज के पुंज हैं। और जब विविध परिस्थियों में अभिव्यक्त होते हैं तो वह अंत्यंत समग्र होती है।  यह ही दिव्य तेज और भयंकर हांक शब्दों से कह रहे हैं।

इस कार्यक्रम में पूज्य गुरूजी के एक पुराने शिष्य स्वामी माधवानंद जी, जो के चिन्मय मिशन रांची में कार्यरत हैं गुरूजी के दर्शन हेतु आये थे। उन्होंने भी अंत में आभार के दो शब्द कहे। कार्यक्रम सा समापन आरती से हुआ।

 

Links : 

Pravachan

Photo Album

Birthday of Poojya Guruji

On 15th Dec 2017 morning, Poojya Guruji after conducting his Mundakopanishad pravachan, did the Rudrabhisheka of Bhagwan Sri Gangeshwar Mahadev in the Ashram Mandir. All arrangements were meticulously & lovingly made by ashram inmates. P. Swamini chanted the mantas and the elaborate puja was done. Abhisheka was done with Dakshinamurty Stotram. Later a Bhandara followed.

On 17th Dec a public program was organized at the Ashram, wherein there was a Flute Rendition Program by a well-known Flute Player of the city – Sh Salil Datey. He had his whole team of Tabla, Octapad & Synthesizer. He gave an hour-long program and then there was a short Memory Game presented by his son Soham, who is a final year Engineering student. Both programs were enchanting. Thereafter Poojya Guruji in his short blessing speech, told everyone about the history and significance of the Flute of Bhagwan Sri Krishna. Later everyone had dinner.

Check out few select photos of the event :

Here is the Playlist of the Flute Rendition Program. In the ned there is the Blessings Speech of Poojya Guruji :

Links:

Album of Puja

Album of Flute Program

This entry was posted on December 20, 2017, in Ashram.

हनुमान चालीसा सत्संग : सितम्बर २०१७

सितम्बर महीने का हनुमान चालीसा सत्संग का कार्यक्रम दिनांक  २४ सितम्बर को वेदांत आश्रम में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का प्रारम्भ सूंदर भजनों  से हुआ, और फिर सबने हनुमान चालीसा का पाठ  किया। तदुपरांत  पूज्य गुरूजी ने हनुमान चालीसा की २१वीं  चौपाई पर अपना प्रवचन आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा की यह चौपाई जहाँ हनुमानजी रामजी के द्वार में बैठे हैं और उनकी आज्ञा के बाद ही कोई भक्त रामजी के दर्शन हेतु अंदर जा कर प्रभु के दर्शन कर पता है – का अर्थ बड़ा गूढ़ है। भगवन का निवास किसी कमरे अथवा मंदिर के अंदर मात्र नहीं होता है, वे तो कण-कण में व्याप्त हैं – फिर भी बगैर हनुमानजी जैसे संत की आज्ञा और आशीर्वाद के भगवन का दर्शन नहीं होता है।  इसका अर्थ यह है, की भगवन को  देखने की दॄष्टि होनी चाहिए तभी भगवन दिखते हैं। जो भगवन को देखने की दॄष्टि  देते हैं वे तो हम लोगों के गुरु होते हैं, अतः यहाँ हनुमानजी को गुरु रूप से बताया जा रहा है।

भगवन के दर्शन के लिए एक तो हमें भगवन का ज्ञान होना चाहिए, और उससे पूर्व ज्ञान की प्राप्ति के लिए उसके लिए उत्कंठा, इच्छा और उत्साह होना चाहिए। इन सब चीजों का होना भक्ति का लक्षण है।  हनुमानजी एक गुरु की तरह बैठ के शास्त्रों का ज्ञान तो नहीं देते हैं, लेकिन वे हम लोगों के अंदर भक्ति जरूर उन्पन्न कर देते हैं। नारद भक्ति सूत्र में उन्हें भक्ति का एक आचार्य कहा गया है।  भक्ति हमें भगवत ज्ञान हेतु पात्रता प्रदान करती है।  हनुमानजी अपने आचरणों से हमें भक्ति का उपदेश देते हैं।  किसी भी व्यक्ति को भगवत भक्ति के लिए कैसे अपने आप को तैयार करना चाहिए, उस विषय पर पूज्य गुरूजी ने अपने प्रवचन में विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने भक्ति की प्राप्ति हेतु राम जी और शबरी के उस प्रसंग की चर्चा करि – जहाँ रामजी खुद भक्ति की प्राप्ति हेतु उपदेश देते हैं।

भक्ति की प्राप्ति हेतु उन्होंने नवधा भक्ति की विस्तार से चर्चा करी।

लिंक : 

प्रवचन 

फोटो एल्बम 

This entry was posted on September 25, 2017, in Ashram.

Short Vedanta Course

A ten days Short Vedanta Course was organized at Vedanta Ashram from 20th to 29th Aug 2017. It was an English language course and the main subject-matter of the discourses was Drg-Dryshya Viveka. Poojya Guruji Sri Swami Atmanandaji conducted the entire course and also conducted one Meditation Class.

Video Recordings: 

Video Recording of the pravachans was also done and uploaded on YouTube. Links of the talks are given below:

Day-1: https://youtu.be/ISonYkRBOIA

Day-2: https://youtu.be/ktTf9cX7jKo

Day-3: https://youtu.be/z0TWOtGcpyY

Day-4: https://youtu.be/cBpk-LWBj08

Day-5: https://youtu.be/t3q7eeraypg

Day-6: https://youtu.be/qirSmbrAKWM

Day-7: https://youtu.be/9f-Z015YoFM

Day-8: https://youtu.be/RvoajafsrNs

Day-9: https://youtu.be/MFbGcVW_ltU

Day-10: https://youtu.be/jap1NSNCkBE

YouTube Playlist Link: https://www.youtube.com/playlist?list=PLuSvZrG7a-I1mPs4jgtP0oux1b0FjoOK_

Audio Recordings: 

All the ten Audio Recordings can also be accessed – from the folder link below:

https://app.box.com/s/67l3eri2vvj72l6z0rsmj42cwas1lzxw

Meditation Link :

https://app.box.com/s/uhygfh3jmt24rkat3nbaetz94jjcwcx5

Photo Album: 

Puja by Neena & Manisha: https://goo.gl/photos/vN8SZgPYYiSEF3X87

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This entry was posted on August 28, 2017, in Ashram, Camp.

Janmashtami Vedanta Camp – 2017

The 2017 Janmashtami Vedanta Camp was organized at Vedanta Ashram, Indore – from 10th to 15th Aug. Campers from Mumbai, Lucknow, Vadodara, Ahmedabad and Jodhpur joined the camp. The subject matter of the camp were Laghu Vakya Vritti by Poojya Guruji Swami Atmanandaji, Gita Chapter-7 by P. Swamini Amitanandaji, Meditation and Chanting classes by P. Swamini Samatanandaji, and Puja under the guidance of P. Swamini Poornanandaji.

 

The day started with Meditation session at 6.00 AM, followed by tea and then Puja, and then there was chanting session. After breakfast there was a marathon session of more than 120 -150 minutes by Poojya Guruji. Later there was the discussion session under the moderation of Poojya Guruji. In this session all the campers expressed their views on some select topic. Then there was lunch. Most of the days someone or the other offered Bhiksha. Devotees kept chanting some shlokas while taking meals. In the evening after tea there was the Gita session, and then after the evening Aarti & dinner there was the bhajan & QnA session.

One of the days everyone sang songs using Karaoke, and on the other day there was a lovely Jokes Session by a devotee – Sh Manohar Agarwal.

 

On 15th Aug, there was the hoisting of the tricolor – by Col Pankaj Misra, and then everyone sang the National Anthem. Later the devotees heard the PM’s address from the ramparts of Red Fort. and after some phalahar was the concluding session of the camp wherein everyone shared their experiences about the camp content and stay at Ashram. It was great joy to see everyone positively benefited & inspired by the camp & ashram stay.

This entry was posted on August 15, 2017, in Ashram.