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Campers Feedback

The last session of the Vedanta Camp which concluded on 1st Sept 2018 was on the morning of 2nd Sept 2018 – the Janmashtami day. After his brief concluding address, Poojya Guruji invited every participant to share his / her experiences of the camp. We recorded the feedback and are sharing the same.

This entry was posted on September 2, 2018, in Ashram, Camp.

हनुमान चालीसा सत्संग: जून २०१८

जून २०१८ का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २४ को वेदांत आश्रम में हुआ। पूर्ववत पहले भक्त मण्डली के द्वारा सुन्दर भजनो का आयोजन हुआ। बाद में पूज्य गुरूजी के आने के बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ और तत्पश्यात पूज्य गुरूजी का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार उन्होंने २७वीं चौपाई पर प्रकाश डाला – सब पर राम तपस्वी राजा … ।

पूज्य गुरूजी ने अपने उद्बोधन में बताया की २७वीं चौपाई में गोस्वामीजी ने पहले भगवन श्री राम की महिमा बताई और फिर बतया की ऐसे प्रभु के समस्त कार्य हनुमानजी ने संपन्न करे। यह शैली एक साहित्यिक अलंकार है। अतः हमें भी इस चौपाई को समझने के लिए पहले रामजी की महिमा का स्मरण करना चाहिए। रामजी तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं उन्होंने तो समस्त क्षेत्र में मर्यादाओं की स्थापना की है। आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श शिष्य, आदर्श पति, आदर्श  मित्र, और सबसे महत्वपूर्ण है आदर्श राजा। वे तो धर्म के मूर्तिमान स्वरुप थे। पूरी रामायण उन्ही की महिमा का बखान कर रही है। रामजी का अवतरण त्रेता युग में हुआ था लेकिन आज भी उनका राज्य आदर्श राज्य की तरह से जाना जाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जिनके कठिन प्रयास और सूझ-बुझ से देश को आज़ादी मिली वे नित्य रामजी का भजन किया करते थे, और स्वतंत्र भारत में राम राज्य की स्थापना उनका भी सपना था।

ऐसे समर्थ और ज्ञानी रामजी ने जितने भी विशेष कार्य संपन्न किये उन सभी में ज्यादातर हनुमानजी उनके चुने हुए निमित्त थे। किसी भी राजा की विशेषता मूल रूप से उसकी दूर-दृष्टी और व्यापक निति होती है, और कोई भी निति तभी सफल होती है जब उसका उचित क्रियान्वयन हो। हनुमानजी क्रियान्वयन के सबसे सूंदर अधिकारी और पात्र थे। हनुमानजी के जीवन और शब्द कोष में असंभव शब्द था ही नहीं, इसलिए रामजी का जो भी संकल्प होता था उसकी सिद्धि सुनिश्चित हो जाती थी।

कुछ लोगो के मन में यहाँ पर एक विचार आ सकता है, की हनुमानजी की ही वजह से रामजी से समस्त कार्य संभव हो पाए। लेकिन जो भी ऐसा विचार भी लता है वह हनुमानजी सो समझता ही नहीं है, और ऐसे विचार से वह हनुमानजी का आशीर्वाद नहीं प्राप्त करेगा बल्कि उनके आक्रोश का भागी बनेगा, क्योंकि हनुमानजी के दृष्टिकोण से यह पूर्णरूप से असत्य है।  जब लंका से वे लौटे तब भगवन श्री राम ने उनके स्तुति करी और पुछा की हनुमान यह तो बताओ की यह सब असंभव तो तुमने कैसे संभव कर दिया। इस पर हनुमानजी बोले की प्रभु हम जो भी करते हैं वो सब आपकी ही महिमा है, हम तो एक वानर मात्र हैं यह आपकी ही महिमा है की एक वानर को भी इतना महिमा मंडित करवा देता है। अतः रामजी की महिमा केवल ाची निति आदि बनाना नहीं है, बल्कि असमर्थ को समर्थ बना के उससे असंभव कार्य करावा देते हैं। रामजी तो त्रिलोक विजेता रावण की लंका को मात्र वानरों की सेना से जीत लेते हैं। अतः हनुमानजी की महिमा भी प्रभु राम की ही महिमा है।

इस चौपाई में एक बात और कही गयी है, और वो है रामजी ऐसे महान कैसे बने। उन्होंने एक शब्द का प्रयोग किया है और वो हैं – तपस्वी। तपस्या ही व्यक्ति तो निर्मल कर देती है वो ही व्यक्ति को महान बनाती है। भगवान का चौदह वर्ष का वनवास शायद सभी को यह ही सन्देश दे रहा है। तपस्वी व्यक्ति काम से काम चीजों में अपना जीवन सुख पूर्वक जीना सीख गया है। इसलिए वो अपने स्वार्थ की नहीं सोचता है। जो स्वार्थ से मुक्त है वो ही सबके कल्याण के बारे में सोच सकता है। पूज्य गुरूजी ने कहा की इस तपस्या के विषय पर वे अगली बार विस्तृत रूप से चर्चा करेंगे।

कार्येक्रम के अंत में पूर्ववत आरती और प्रसाद वितरण हुआ।

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प्रवचन 

हनुमान चालीसा मासिक सत्संग: मई २०१८

मई २०१८ का मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २७ को वेदांत आश्रम में हुआ। पूर्ववत पहले भक्त मण्डली के द्वारा सुन्दर भजनो का आयोजन हुआ। बाद में पूज्य गुरूजी के आने के बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ और तत्पश्यात पूज्य गुरूजी का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी उन्होंने २५वीं और २६वीं चौपाईयों में सूचित साधनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया की यह बात निश्चित रूप से सत्य है की जैसे २५वीं चौपाई में कहा गया है की हनुमानजी की कृपा से सब रोग नष्ट हो जाते हैं और पीड़ाएँ भी समाप्त हो जाती हैं, और २६वीं चौपाई में बताया गया है की हनुमानजी हम सबको संकट से छुड़ा देते हैं – लेकिन यहाँ एक बात दृष्टव्य है की ऐसी कृपा की प्राप्ति के लिए हमारा भी कुछ पुरुषार्थ आपेक्षित है। अगर कोई यह सोचे की केवल निवेदन करने से हनुमानजी यह सब कर देंगे, तो यह पूर्ण सत्य नहीं है। गोस्वामीजी ने स्पष्ट कहा है की २५वीं चौपाई का फल तो तभी प्राप्त होगा जब हम – जपत निरंतर हनुमत वीरा। हमें निरंतर हनुमानजी की महिमा का जप करना चाहिए। जप साधना की बहुत महिमा है। गीता में भी कहा गया है की – यज्ञानां जपयज्ञोस्मि। जप का प्रयोजन अपने इष्ट का सतत संज्ञान बताये रखना होता है। यह स्मरण परिस्थिति निरपेक्ष होना चाहिए। परिस्थिति अच्छी हो या बुरी ईश्वर का भान जो भी बनाये रखता है उसे कोई भी संकट कैसे आ सकता है। संकट तो तभी आता है जब कुछ अपने छोटे से कंधों पर बोझा आ जाता है। जब हमें लगता है की सब कुछ हम ही करते हैं। ऐसे लोग ही तनाव ग्रसित हो जाते हैं।

२६वीं चौपाई में गोस्वामीजी कहते हैं की यहाँ भी संकट से निवृत्ति नैमित्तिक है। उसी व्यक्ति का सब संकट दूर हो जाएगा जो एक विशेष साधना की सिद्धि करेगा। और वो है – मन क्रम वचन धयान जो लावै। संकट से निवृत्ति, हनुमानजी के सुन्दर ध्यान रुपी साधना का आशीर्वाद है। यह ध्यान भी बहुत समग्रता से होना चाहिए। वे कहते हैं की जो व्यक्ति मन, कर्म और वचन तीनों धरातल का प्रयोग करता हुआ भगवन का ध्यान करता है – उस ध्यान से ही एक विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। केवल धयान ही नहीं बल्कि कोई भी काम जब समग्रता से किया जाये तब ही हमें सफलता प्रदान करता है।  हनुमानजी उस जीवन दर्शन के प्रतिक हैं जो अपने लिए नहीं बल्कि अपने भगवन राम के लिए ही जीते हैं।  ऐसे निःस्वार्थ व्यक्ति को अपनी तो कोई समस्या होती ही नहीं है।  अतः ऐसे भक्तों के निश्चित रूप से सब संकट दूर हो जाते हैं।

अंत में पूज्य गुरूजी २७वीं चौपाई में मात्र प्रवेश करते हुए भगवन श्री राम जो सबसे उत्कृष्ट हैं उनके भी कार्य हनुमानजी पूरे करते हैं इसीसे हम सबको हनुमानजी की महिमा का ज्ञान होता है।  इस चौपाई की विस्तृत चर्चा २४वीं  जून को होगी। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण से हुआ।

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प्रवचन 

Raghu Iyer gives Photography Tips

On 26th May, Sh Raghu Iyer, a very dedicated and passionate Wildlife Photographer was invited to Vedanta Ashram to enlighten the Ashram Mahatmas & devotees about the intricacies and tips of Field Photography. After the darshan of Bhagwan Sri Gangeshwar Mahadev in the Ashram Mandir, we had our very enlightening session of more than 90 minutes.

Raghu brought a very helpful chart for everyone to get an idea of Aperture / Shutter & ISO adjustments. He brought his various award-winning pictures and explained them too.

His wife Jaishree and son Ashwin also came. After dinner for which they also brought a lovely dish, Jaishree Raghunandan sang two lovely bhajans in Carnatic music style, which literally had a cool meditative effect.

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अखिल हर्डिया जी द्वारा फोटोग्राफी के टिप्स

दिनांक  २३ मई २०१८ को वेदान्त  आश्रम में इंदौर शहर के जाने-माने फोटोग्राफर श्री अखिल हर्डिया जी को आश्रम के अंतेवासियों को फोटोग्राफी का मूलभूत एवं आवश्यक ज्ञान देने हेतु आमंत्रित किया गया। अखिलजी इस क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से समर्पित हैं, और अभी वे स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहते हैं। इससे पूर्व वे अनेको वर्षो से दैनिक भास्कर समूह से जुड़े रहे, और उन्हें सैकड़ों पुरस्कार से अलंकृत किया जाता रहा है। आज वे देवी अहिल्याबाई विस्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन के विजिटिंग फैकल्टी भी हैं।

उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष प्रकाश डाला:

– कैमरे और लेंस का परिचय

– अच्छी फ़ोटो खीचने के लिए किन बातों के ध्यान रखना चाहिए

– ज्यादा और कम लाइट में कैसे फ़ोटो खिंचे

– कम लाइट में बिना फ़्लैश

– फोकस करने के बावद, कई बार ऑटो-फोकस फोकस ही करता ही रहता है, और समय निकल जाता है

– उड़ते पक्षी आदि की फ़ोटो

– डेप्थ ऑफ़ फील्ड कम-ज्यादा करना

– चलती वस्तु की फ़ोटो

– एक्सपोज़र कम-ज्यादा करना

वे अपने साथ कुछ अपनी विशेष फोटो भी लाये थे, जिन्हे उन्होंने समझा के बतलाया। बाद में कुछ प्रश्न-उत्तर भी हुए। उनके साथ फोटोग्राफी के एक प्रेमी श्री नवीन चंद्र थापक जी भी आये थे। थापकजी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के एक सेवा निवृत्त मैनेजर हैं।

बाद में भोजन का आयोजन था।

 

हनुमान चालीसा सत्संग: अप्रैल २०१८

अप्रैल २०१८ का हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २९ अप्रैल को वेदांत आश्रम में आयोजित हुआ। पूर्ववत पहले सुन्दर भजनों  की प्रस्तुति हुई और फिर पूज्य गुरूजी के व्यास पीठ पर पधारने के बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। तदोपरांत प्रवचन का प्रारम्भ हुआ। उसमे पहले २५वीं चौपाई पर चर्चा हुई और फिर २६वीं चौपाई में प्रवेश हुआ।

 

२५वीं चौपाई पर चर्चा करते हुए पूज्य गुरूजी ने बताया की रोग स्थूल शरीर में होते हैं और पीड़ा मन में होती है, रोग भी दर्द देता है, लेकिन आसक्त और अज्ञानी मन पीड़ा को कई गुना बढ़ा देता है। कई बार तो मन अनेकानेक समस्यों की उपेक्षा करके व्यथा से मुक्त भी रह सकता है। अतः अगर मन विवेकी होता है तो हमारे विविध रोग और तद्जनित पीड़ाएँ नष्ट-प्रायः हो जाती हैं। इस अत्यंत कल्याणकारी सिद्धि के लिए यहाँ गोस्वामीजी कहते हैं की व्यक्ति में निरंतर जप का सामर्थ्य होना चाहिए। शरीर और मन के विकारों से मुक्त रहने का सामर्थ्य की प्राप्ति में जप का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। जप में हम अपने मन को धन्यता से ईश्वर के चरणों में लगाना सीखते हैं। जब मन हमारी इच्छा से कहीं और लग सकता है तो स्वाभाविक है की बाकि किसी चीज की संवेदना नहीं रहती है। कोई भी अनुभूति हम लोगों की मानसिक संवेदना पर ही आश्रित होती हैं। अतः अपनी प्रेरणा के आस्पद के चरणों में मन लगा पाने की सिद्धि हमें विकारों से अप्रभावित कर देती है। यह हमारे इष्ट की ही कृपा से होता है।

जप के बारे में पूज्य गुरूजी ने आगे बताया की जप जो की ईश्वर की एक विभूति है, उसके तीन सोपान हैं – उच्च जप, मंद जप, और चित्तजम जप, और इसका पर्यवसान ध्यान की सिद्धि में होता है। इन तीनो के बारे में संक्षेप में बताया गया, और सभी को नित्य ईश्वर के नाम का जप करने की प्रेरणा दी गयी, तथा निरंतर जप का भी आशय बताया गया। निरंतर जप का आशय सतत ईश्वर की सन्निधि का अनुभव होता है – जो की परिस्थिति निरपेक्ष हो। अर्थात सुख हो अथवा दुःख, ईश्वर के अस्तित्व और माहत्म्य का सतत अनुभव और स्मरण होता है। विवेकी व्यक्ति रोग आदि का बाहरी उपचार तो करता ही है, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण मन का सामर्थ्य होता है। यह ही इस सुन्दर चौपाई का रहस्य है।

२६वीं चौपाई में प्रवेश करते हुए उन्होंने बताया की गोस्वामिजी कहते हैं की जप की सिद्धि का पर्यवसान ध्यान के सामर्थ्य की प्राप्ति होती है, और जब यह सामर्थ्य प्राप्त होने लगता है तब तो हनुमानजी की कृपा से कोई संकट रहते ही नहीं हैं। ध्यान की महिमा को आज विश्व ने जाना है, इसीलिए इसकी इतनी प्रसिद्धि हो गयी है। ध्यान में किसी वस्तु में हमारा मन तल्लीन हो जाता है। मन न रहे दस-बीस अतः एक मन कहीं लीं हो जाता है तो कोई संकट नहीं रहता है। ऐसे व्यक्ति की बुद्धि भी विकसित होने लगती है, अतः किसी भी समस्याओं का प्रामाणिक उपचार का शोध होता है और असंगता भी। पूज्य गुरूजी ने कहा की इस विषय को अगले सत्र में आगे चर्चा के लिए लेंगे।

अंत में आरती और प्रसाद वितरण हुआ।

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प्रवचन 

Sankaracharya Jayanti Celebrations

On 20th April 2018 was the Jayanti of Bhagwan Sri Aadi Sankaracharya – Jyestha Shukla Panchami. The great Acharya was born in Kalady village of Kerala in 509 BC (and not 788 AD) which makes it 2527 years earlier. He literally started the rennaisance of Sanatan Dharma, presented the subtle tenets of Sanatan Dharma very logically, rejuvenated the religious traditions & systems etc. He is no wonder very venerated Mahatma.

At Vedanta Ashram we have a statue of Bhagwan Sankaracharya in our Satsang Hall, and also a Sankaracharya Gate in the E-Sector of Sudama Nagar with his statue. A special program was organized in the evening. After paying obesainces at the feet of the great Acharya in the Ashram, Poojya Guruji along with Ashram Mahatmas and devotees went in a procession to the Sankaracharya Dwar. Using a ladder one of the devotees Sh Vinod Puri of Dashnam Goswami Samaj, went upto the statue and cleaned it, did abhishek, and appropriately decorated it. Later Aarti was done and prasad distributed.

Later after coming back to Ashram, Poojya Guruji gave a short overview of the life of Aadi Sankara. Later poha & tea was organized for all.

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‘Birds of Indore’- Presentation

On 14th April 2018, Saturday evening, an Audio-Visual Presentation on the topic of BIRDS OF INDORE by Padma Shri Bhalu Mondheji was organized at Vedanta Ashram. Bhaluji is a well acclaimed Conservationist and Nature-Lover, who along with his NGO, the Natures Volunteers, has done pioneering work to restore & rejuvenate the Sirpur Lake of Indore.  Today Sirpur Lake has been designated as an IBA – Important Bird Area, by the BNHS. The area has around 300+ species of birds including the state bird of MP, namely, the beautiful Asian Paradise Flycatcher.

The presentation was organized in the second floor Dining Hall, and the enthusiasm was such that it was shortly fully packed. Projector and Screen were timely organized, and the program started around 8.00 PM and lasted for 90 minutes. It was a great eye-opener for many, who have been living in the city but were not aware of its avian heritage. In the end there were some Q&A too. In the end Baisakhi Dinner was organized for all – courtesy Sh Vinod Arora & family.

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This entry was posted on April 15, 2018, in Ashram.

मंदिरों का आध्यात्मिक विकास में योगदान

आध्यात्मिक विकास मूल रूप से मात्र ज्ञान से सम्भव होता है, लेकिन तत्त्व ज्ञान के किये एक सात्त्विक, सूक्ष्म और संवेदनशील मन की आवश्यकता होती है। यह ही विविध साधनाओं का प्रयोजन होता है। ईश्वर शब्द का वाच्यार्थ अर्थ देखने से आवश्यक गुण प्राप्त हो जाते हैं। जो वाच्यार्थ को नहीं देख सकता उस के लिए लक्ष्यार्थ देखना तो कल्पना मात्र है। सनातन धर्म में ईश्वर शब्द का प्रारम्भ में वाच्यार्थ देखने की बहुत महिमा होती है। हम लोगों के अनेकानेक मंदिरों का यह ही प्रयोजन होता है। जब कोई श्रद्धालु मंदिर जाता है तो ईश्वर का विग्रह देख के मन में अनेकों परिवर्तनों की संभावना होती है – जो की हम लोगों के आध्यात्मिक विकास में महत्व पूर्ण योगदान देते हैं।  इन विविध परिवर्तनों की चर्चा पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्दजी ने अपने मुंडक उपनिषद् के प्रवचनों में एक दिन की।

आश्रम के सभी महात्माओं ने इस विषय को भिन्न-भिन्न भाषाओँ में प्रस्तुत किया है। पूज्य गुरूजी ने हिंदी में, पूज्य स्वामिनी अमितानंदजी ने गुजराती में, पूज्य स्वामिनी पूर्णानन्दजी ने मराठी में, एवं पूज्य स्वामिनी समतानन्दजी ने अंग्रेजी भाषा में इस महत्वपूर्ण विषय को प्रस्तुत किया है। प्रवचन ध्यान से सुनाने योग्य है।

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Talk in Gujarati – by P. Swamini Amitanandaji :

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Talk in Marathi – by P. Swamini Poornanandaji :

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Talk in English – by P. Swamini Samatanandaji :

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This entry was posted on March 14, 2018, in Ashram.

हनुमान चालीसा सत्संग – फरवरी २०१८

वेदांत आश्रम में दिनांक  18/२ को फरवरी  मॉस के मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन हुआ। प्रारम्भ में पूर्ववत भजनो का कार्यक्रम हुआ, और फिर हनुमान चालीसा के पाठ  के बाद पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानंदजी महाराज का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार २४वीं  चौपाई पर प्रवचन हुआ – भूत पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे।।  प्रारम्भ में गाया हुआ एक सुन्दर भजन :

 

उन्होंने बताया की भूत और पिशाच तामसी योनियां होती हैं, जो की मूल रूप से काम और क्रोध के अतिरेक की अग्रिम रूप और अभिव्यक्ति होती हैं। हमारे मन में जो भी विकार होते हैं वे जब प्रबल हो जाते हैं तब वे बाहर भी अभिव्यक्त हो कर दिखने लगते हैं। ईश्वर की भक्ति से युक्त होकर उनका अपने आखों से दर्शन भी इसी सिद्धांत के अनुरूप होता है। दुनियां में होती तो बहुत सारी चीजें हैं लेकिन दिखते वो ही है जिसका हमारे मन में महत्त्व होता है। जो भूतकाल की अतृप्त कामनाओं से व्यथित होते हैं उन्हें उनका भूतकाल अपनी चिंताओं और डर से युक्त होकर भूत के रूप में प्रगट होकर डराता रहता है। और जो अपनी अपूर्त आकांक्षाओं के कारण किसी न किसी बाह्य हेतु को उसका जिम्मेदार समझते हैं वे क्रोध की आग में जलते हैं और यह ही अपने अग्रिम रूप में पिशाच बनकर उन्हें डराता रहता है। ऐसे लोगों की दृष्टि से भूत पिशाच निश्चित रूप से होते हैं और उन्हें न केवल दिखते हैं बल्कि उन्हें डराते भी हैं। इन सब सिद्धांत का प्रमाण यह है की ये ही भूत आदि दूसरों को दिखते भी नहीं हैं। वेदांत का सिद्धांत है की हमारी दृष्टि ही सृष्टि उत्पन्न करती है, अतः जिन लोगों  को दिखते हैं वे सब उनके लिए निश्चित रूप से सत्य होते हैं, और उनका उचित उपचार करना आवश्यक होता है।

नकारात्मक सोच के शारीरिक अथवा मानसिक दुष्परिणाम किसी औषधियों से नहीं बल्कि सकारात्मक सोच से ही स्थायी रूप से दूर करे जा सकते हैं।  अतः गोस्वामीजी कहते हैं की जो-जो लोग ऐसे दुष्परिणामों के शिकार हैं उनके लिए हनुमानजी का नाम ही पर्याप्त है। अच्छाई के अस्तित्व की आस्था बुराई की निवृत्ति का पहला कदम होती है। अतः हनुमानजी के नाम मात्र का उच्चारण इन भूत और पिशाचों को दूर भगा देता है। हनुमानजी जैसे भक्तों के चरित्र का चिंतन आगे चल के हमें काम-क्रोध आदि विकारों से ही मुक्त करके भक्ति का प्रसाद प्रदान कर देता है। यह ही बात इस चौपाई में बताई गई है।

कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद से हुआ।

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प्रवचन

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