Raghu Iyer gives Photography Tips

On 26th May, Sh Raghu Iyer, a very dedicated and passionate Wildlife Photographer was invited to Vedanta Ashram to enlighten the Ashram Mahatmas & devotees about the intricacies and tips of Field Photography. After the darshan of Bhagwan Sri Gangeshwar Mahadev in the Ashram Mandir, we had our very enlightening session of more than 90 minutes.

Raghu brought a very helpful chart for everyone to get an idea of Aperture / Shutter & ISO adjustments. He brought his various award-winning pictures and explained them too.

His wife Jaishree and son Ashwin also came. After dinner for which they also brought a lovely dish, Jaishree Raghunandan sang two lovely bhajans in Carnatic music style, which literally had a cool meditative effect.

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अखिल हर्डिया जी द्वारा फोटोग्राफी के टिप्स

दिनांक  २३ मई २०१८ को वेदान्त  आश्रम में इंदौर शहर के जाने-माने फोटोग्राफर श्री अखिल हर्डिया जी को आश्रम के अंतेवासियों को फोटोग्राफी का मूलभूत एवं आवश्यक ज्ञान देने हेतु आमंत्रित किया गया। अखिलजी इस क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से समर्पित हैं, और अभी वे स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहते हैं। इससे पूर्व वे अनेको वर्षो से दैनिक भास्कर समूह से जुड़े रहे, और उन्हें सैकड़ों पुरस्कार से अलंकृत किया जाता रहा है। आज वे देवी अहिल्याबाई विस्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन के विजिटिंग फैकल्टी भी हैं।

उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष प्रकाश डाला:

– कैमरे और लेंस का परिचय

– अच्छी फ़ोटो खीचने के लिए किन बातों के ध्यान रखना चाहिए

– ज्यादा और कम लाइट में कैसे फ़ोटो खिंचे

– कम लाइट में बिना फ़्लैश

– फोकस करने के बावद, कई बार ऑटो-फोकस फोकस ही करता ही रहता है, और समय निकल जाता है

– उड़ते पक्षी आदि की फ़ोटो

– डेप्थ ऑफ़ फील्ड कम-ज्यादा करना

– चलती वस्तु की फ़ोटो

– एक्सपोज़र कम-ज्यादा करना

वे अपने साथ कुछ अपनी विशेष फोटो भी लाये थे, जिन्हे उन्होंने समझा के बतलाया। बाद में कुछ प्रश्न-उत्तर भी हुए। उनके साथ फोटोग्राफी के एक प्रेमी श्री नवीन चंद्र थापक जी भी आये थे। थापकजी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के एक सेवा निवृत्त मैनेजर हैं।

बाद में भोजन का आयोजन था।

 

Vedanta Sandesh – May 2018

The May 2018 edition of Vedanta Sandesh is the English monthly eMagazine of International Vedanta Mission, containing inspiring and enlightening articles of Vedanta & Hinduism, and news of the activities of Vedanta Mission & Ashram – has been published. You can check it out from the links below:

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This entry was posted on May 1, 2018, in Magazines.

हनुमान चालीसा सत्संग: अप्रैल २०१८

अप्रैल २०१८ का हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन दिनांक २९ अप्रैल को वेदांत आश्रम में आयोजित हुआ। पूर्ववत पहले सुन्दर भजनों  की प्रस्तुति हुई और फिर पूज्य गुरूजी के व्यास पीठ पर पधारने के बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। तदोपरांत प्रवचन का प्रारम्भ हुआ। उसमे पहले २५वीं चौपाई पर चर्चा हुई और फिर २६वीं चौपाई में प्रवेश हुआ।

 

२५वीं चौपाई पर चर्चा करते हुए पूज्य गुरूजी ने बताया की रोग स्थूल शरीर में होते हैं और पीड़ा मन में होती है, रोग भी दर्द देता है, लेकिन आसक्त और अज्ञानी मन पीड़ा को कई गुना बढ़ा देता है। कई बार तो मन अनेकानेक समस्यों की उपेक्षा करके व्यथा से मुक्त भी रह सकता है। अतः अगर मन विवेकी होता है तो हमारे विविध रोग और तद्जनित पीड़ाएँ नष्ट-प्रायः हो जाती हैं। इस अत्यंत कल्याणकारी सिद्धि के लिए यहाँ गोस्वामीजी कहते हैं की व्यक्ति में निरंतर जप का सामर्थ्य होना चाहिए। शरीर और मन के विकारों से मुक्त रहने का सामर्थ्य की प्राप्ति में जप का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। जप में हम अपने मन को धन्यता से ईश्वर के चरणों में लगाना सीखते हैं। जब मन हमारी इच्छा से कहीं और लग सकता है तो स्वाभाविक है की बाकि किसी चीज की संवेदना नहीं रहती है। कोई भी अनुभूति हम लोगों की मानसिक संवेदना पर ही आश्रित होती हैं। अतः अपनी प्रेरणा के आस्पद के चरणों में मन लगा पाने की सिद्धि हमें विकारों से अप्रभावित कर देती है। यह हमारे इष्ट की ही कृपा से होता है।

जप के बारे में पूज्य गुरूजी ने आगे बताया की जप जो की ईश्वर की एक विभूति है, उसके तीन सोपान हैं – उच्च जप, मंद जप, और चित्तजम जप, और इसका पर्यवसान ध्यान की सिद्धि में होता है। इन तीनो के बारे में संक्षेप में बताया गया, और सभी को नित्य ईश्वर के नाम का जप करने की प्रेरणा दी गयी, तथा निरंतर जप का भी आशय बताया गया। निरंतर जप का आशय सतत ईश्वर की सन्निधि का अनुभव होता है – जो की परिस्थिति निरपेक्ष हो। अर्थात सुख हो अथवा दुःख, ईश्वर के अस्तित्व और माहत्म्य का सतत अनुभव और स्मरण होता है। विवेकी व्यक्ति रोग आदि का बाहरी उपचार तो करता ही है, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण मन का सामर्थ्य होता है। यह ही इस सुन्दर चौपाई का रहस्य है।

२६वीं चौपाई में प्रवेश करते हुए उन्होंने बताया की गोस्वामिजी कहते हैं की जप की सिद्धि का पर्यवसान ध्यान के सामर्थ्य की प्राप्ति होती है, और जब यह सामर्थ्य प्राप्त होने लगता है तब तो हनुमानजी की कृपा से कोई संकट रहते ही नहीं हैं। ध्यान की महिमा को आज विश्व ने जाना है, इसीलिए इसकी इतनी प्रसिद्धि हो गयी है। ध्यान में किसी वस्तु में हमारा मन तल्लीन हो जाता है। मन न रहे दस-बीस अतः एक मन कहीं लीं हो जाता है तो कोई संकट नहीं रहता है। ऐसे व्यक्ति की बुद्धि भी विकसित होने लगती है, अतः किसी भी समस्याओं का प्रामाणिक उपचार का शोध होता है और असंगता भी। पूज्य गुरूजी ने कहा की इस विषय को अगले सत्र में आगे चर्चा के लिए लेंगे।

अंत में आरती और प्रसाद वितरण हुआ।

लिंक्स: 

फोटो एल्बम 

प्रवचन 

Gita Gyana Yagna, Jalgaon

A week-long GITA GYANA YAGNA was organized at Dutta Mandir, Jalgaon by Poojya Swamini Poornanandaji. The program was from 16th to 22nd April, and the subject matter of the twin discourses were : Gita Chapter 10 and Narada Bhakti Sutras.

This entry was posted on April 21, 2018, in GGY, Mission.

Sankaracharya Jayanti Celebrations

On 20th April 2018 was the Jayanti of Bhagwan Sri Aadi Sankaracharya – Jyestha Shukla Panchami. The great Acharya was born in Kalady village of Kerala in 509 BC (and not 788 AD) which makes it 2527 years earlier. He literally started the rennaisance of Sanatan Dharma, presented the subtle tenets of Sanatan Dharma very logically, rejuvenated the religious traditions & systems etc. He is no wonder very venerated Mahatma.

At Vedanta Ashram we have a statue of Bhagwan Sankaracharya in our Satsang Hall, and also a Sankaracharya Gate in the E-Sector of Sudama Nagar with his statue. A special program was organized in the evening. After paying obesainces at the feet of the great Acharya in the Ashram, Poojya Guruji along with Ashram Mahatmas and devotees went in a procession to the Sankaracharya Dwar. Using a ladder one of the devotees Sh Vinod Puri of Dashnam Goswami Samaj, went upto the statue and cleaned it, did abhishek, and appropriately decorated it. Later Aarti was done and prasad distributed.

Later after coming back to Ashram, Poojya Guruji gave a short overview of the life of Aadi Sankara. Later poha & tea was organized for all.

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‘Birds of Indore’- Presentation

On 14th April 2018, Saturday evening, an Audio-Visual Presentation on the topic of BIRDS OF INDORE by Padma Shri Bhalu Mondheji was organized at Vedanta Ashram. Bhaluji is a well acclaimed Conservationist and Nature-Lover, who along with his NGO, the Natures Volunteers, has done pioneering work to restore & rejuvenate the Sirpur Lake of Indore.  Today Sirpur Lake has been designated as an IBA – Important Bird Area, by the BNHS. The area has around 300+ species of birds including the state bird of MP, namely, the beautiful Asian Paradise Flycatcher.

The presentation was organized in the second floor Dining Hall, and the enthusiasm was such that it was shortly fully packed. Projector and Screen were timely organized, and the program started around 8.00 PM and lasted for 90 minutes. It was a great eye-opener for many, who have been living in the city but were not aware of its avian heritage. In the end there were some Q&A too. In the end Baisakhi Dinner was organized for all – courtesy Sh Vinod Arora & family.

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This entry was posted on April 15, 2018, in Ashram.

Vedanta Sandesh – April 2018

The Apr 2018 edition of Vedanta Sandesh is the English monthly eMagazine of International Vedanta Mission, containing inspiring and enlightening articles of Vedanta & Hinduism, and news of the activities of Vedanta Mission & Ashram – has been published. You can check it out from the links below:

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This entry was posted on April 1, 2018, in Magazines.

हनुमान चालीसा सत्संग: मार्च २०१८

वेदांत आश्रम में दिनांक  25/3 को मार्च मॉस के मासिक हनुमान चालीसा सत्संग का आयोजन हुआ। प्रारम्भ में पूर्ववत भजनो का कार्यक्रम हुआ, और फिर हनुमान चालीसा के पाठ  के बाद पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानंदजी महाराज का प्रवचन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी कुछ समय २४वीं  चौपाई पर चर्चा करने के बाद २५वे चौपाई (नाशै  रोग हरै  सब पीरा।  जपत निरंतर हनुमत बीरा।।) में प्रवेश हुआ।

पूज्य गुरूजी ने बताया की भूत और पिशाच काम और क्रोध के अतिरेक की अभिव्यक्तियाँ होते हैं। वैसे भी जब किसी को काम और क्रोध का आवेश आता है – तो भी वह भूत की ही तरह उसके ऊपर चढ़ कर उन्हें अपने वश में कर अकल्पनीय काम करवा देता है, जब मनुष्य अपने वश में नहीं रह पता है, लेकिन अत्यंत जोश में कार्य भी करता है – तभी कहा जाता है की उसके ऊपर कोई भूत सा चढ़ गया है।  पिशाच क्रोध के अतिरेक की बाह्य अभिव्यक्ति होती है – ऐसे लोग हिंसक भी हो सकते हैं। जहाँ भूत मनुष्य को बेबस करके कुछ कार्य करवाता है, वहीँ, पिशाच मनुष्य को संवेदनाविहीन करके हिंसक भी कर देता है। ऐसे लोगों को देखा जाये तो एक बात स्पष्ट दिखती है की ये लोग मूल रूप से स्वार्थ से ही प्रेरित होते हैं। दूसरी तरफ भक्ति तो अपने आराध्य के प्रति शरणागति है। भक्त तो यह देखता है की जो भी चल रहा है वो सब ईश्वर की ही कृपा से चल रहा है, और इस तरह वो अपने स्वार्थ प्रेरित आकांक्षाओं से मुक्त रहता है। सात्त्विक मन में काम और क्रोध आदि विकारों के अस्तित्व नहीं होता है, अतः भूत-प्रेत आदि का चढ़ना उनके जीवन में नहीं होता है। बल्कि अगर किसी के ऊपर ऐसी कुछ छाया भी हो तो धन्यता की प्रतिमूर्ति हनुमानजी के स्मरण मात्र से दूर हो जाती है।

पूज्य गुरूजी ने बताया की यद्यपि यह चौपाई भूत-पिशाच से निवृत्ति के उपाय बताने के कारण अत्यंत प्रसिद्ध है, क्यूंकि अज्ञानी लोगों को अनेकानेक चीज़ों का डर  लगा रहता है, लेकिन इस चौपाई की विवक्षा मूल रूप कुछ और है। मूल विवक्षा तो महावीर के नाम उच्चारण की महिमा है।

कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद से हुआ।

लिंक्स: 

Pravachan

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मंदिरों का आध्यात्मिक विकास में योगदान

आध्यात्मिक विकास मूल रूप से मात्र ज्ञान से सम्भव होता है, लेकिन तत्त्व ज्ञान के किये एक सात्त्विक, सूक्ष्म और संवेदनशील मन की आवश्यकता होती है। यह ही विविध साधनाओं का प्रयोजन होता है। ईश्वर शब्द का वाच्यार्थ अर्थ देखने से आवश्यक गुण प्राप्त हो जाते हैं। जो वाच्यार्थ को नहीं देख सकता उस के लिए लक्ष्यार्थ देखना तो कल्पना मात्र है। सनातन धर्म में ईश्वर शब्द का प्रारम्भ में वाच्यार्थ देखने की बहुत महिमा होती है। हम लोगों के अनेकानेक मंदिरों का यह ही प्रयोजन होता है। जब कोई श्रद्धालु मंदिर जाता है तो ईश्वर का विग्रह देख के मन में अनेकों परिवर्तनों की संभावना होती है – जो की हम लोगों के आध्यात्मिक विकास में महत्व पूर्ण योगदान देते हैं।  इन विविध परिवर्तनों की चर्चा पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्दजी ने अपने मुंडक उपनिषद् के प्रवचनों में एक दिन की।

आश्रम के सभी महात्माओं ने इस विषय को भिन्न-भिन्न भाषाओँ में प्रस्तुत किया है। पूज्य गुरूजी ने हिंदी में, पूज्य स्वामिनी अमितानंदजी ने गुजराती में, पूज्य स्वामिनी पूर्णानन्दजी ने मराठी में, एवं पूज्य स्वामिनी समतानन्दजी ने अंग्रेजी भाषा में इस महत्वपूर्ण विषय को प्रस्तुत किया है। प्रवचन ध्यान से सुनाने योग्य है।

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Talk in Gujarati – by P. Swamini Amitanandaji :

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Talk in Marathi – by P. Swamini Poornanandaji :

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Talk in English – by P. Swamini Samatanandaji :

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This entry was posted on March 14, 2018, in Ashram.